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'राजनीति में संयम जरूरी, निराशा कभी स्थायी नहीं होती': नई जिम्मेदारी पर बोले पूनिया; किसे बताया टर्निंग पॉइंट?

Mon, 17 Aug 2026 09:37 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

सतीश पूनिया ने राष्ट्रीय महामंत्री की नई जिम्मेदारी मिलने पर पार्टी के आदेश को सर्वोपरि बताया। उन्होंने संगठन मजबूत करने, राजस्थान के जनहित मुद्दे उठाने और कार्यकर्ताओं को मेहनत जारी रखने की अपील की। पूनिया ने कहा कि राजनीति में संयम जरूरी है और निराशा स्थायी नहीं होती।
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सांसद सतीश पूनिया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया ने राष्ट्रीय महामंत्री पद की नई जिम्मेदारी मिलने के बाद कहा कि पार्टी नेतृत्व उन्हें जब भी जो जिम्मेदारी देता है, वह उसे पूरी निष्ठा और क्षमता के साथ निभाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के आदेशों का पालन करते हुए संगठन के लिए सकारात्मक परिणाम देना ही उनकी प्राथमिकता रहेगी।

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नई जिम्मेदारी और संगठन का विस्तार
सतीश पूनिया ने कहा कि प्रधानमंत्री के वर्ष 2047 के विजन को साकार करने के लिए सभी कौमों और वर्गों को साथ लेकर चलना जरूरी है। नई जिम्मेदारी को लेकर उन्होंने कहा कि वह अब अपनी व्यक्तिगत पसंद और नापसंद से ऊपर उठ चुके हैं और पार्टी का फैसला ही उनके लिए सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में भाजपा संगठन को और मजबूत बनाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। साथ ही, सांसद के रूप में वह राजस्थान से जुड़े जनहित के मुद्दों को उच्च सदन में उठाकर केंद्र सरकार के माध्यम से उनके समाधान के लिए पूरी ताकत से प्रयास करते रहेंगे।

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हरियाणा चुनाव बना महत्वपूर्ण मोड़
हरियाणा विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए नवनियुक्त राष्ट्रीय महामंत्री ने इसे अपने राजनीतिक सफर का बड़ा टर्निंग पॉइंट बताया। उन्होंने कहा कि हरियाणा में काम करने के दौरान उन्हें काफी कुछ सीखने का अवसर मिला। केंद्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में वहां बनी मजबूत टीम के साथ मिलकर उन्होंने बेहतर परिणाम दिए। इसके बाद उन्हें दिल्ली, बिहार और कर्नाटक जैसे प्रमुख राज्यों में भी पार्टी संगठन के लिए जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिला।
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चुनावी हार के बाद संयम का महत्व
राजस्थान विधानसभा चुनाव में मिली हार के संबंध में सतीश पूनिया ने कहा कि सामान्य इंसान और भावुक व्यक्ति होने के नाते हार के बाद कुछ क्षणों के लिए निराशा होना स्वाभाविक है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति और सार्वजनिक जीवन में संयम का बहुत बड़ा महत्व है और निराशा कभी स्थायी नहीं होती। पूनिया ने पार्टी के आम कार्यकर्ताओं से भी संयम और निष्ठा बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता लगातार मेहनत करते रहें, क्योंकि पार्टी नेतृत्व योग्यता और परिश्रम के आधार पर उचित फल जरूर देता है।

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