जो बेटी परिवार की जिम्मेदारी उठा रही थी वह अब नहीं रही। दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई। बेटी के जाने से बुजुर्ग माता-पिता पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार में तंगहाली ऐसी कि उसके अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं हैं। जिससे लकड़ियां खरीदकर उसकी चिता को आग लगाई जा सके। आखिर में समाज के लोगों ने परिवार की मदद कर अंतिम संस्कार काराया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मामला राजस्थान के अलवर जिले का है। यहां 28 साल अनुराधा की शनिवार को दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। वह एक कंपनी में दस-बारह हजार रुपए की नौकरी कर परिवार का खर्च चला रही थी। उसके ऊपर माता-पिता और दिमागी रूप से कमजोर भाई की जिम्मेदारी थी। कड़ी मेहनत कर वह परिवार का पेट भर रही थी। छह महीने पहले अनुराधा की पीठ में दर्द होने के कारण वह काम नहीं कर पा रही थी। इसके बाद मजबूरी में उसने नौकरी छोड़ दी थी।
बीमारी के बाद वापस लौटी घर
अनुराधा जयपुर में रह रही थी। उसके परिचित ने कम पैसे में उसे किराए का कमरा दिला दिया था। बीमारी के बाद अनुराधा वापस घर आ गई थी। बीते शनिवार को अचानक उसके सीने में दर्द हुआ तो परिजन उसे सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अगले समाज के लोग सामने आए और उसका अंतिम संस्कार कराया।
भाई दिगामी रूप से कमजोर
अनुराधा का भाई दिमागी रूप से कमजोर है। उसके पिता भी बुजुर्ग है। वह अनुराधा का सहयोग करने के लिए छोटी सी नौकरी करते थे। अनुराधा की मौत के बाद से उनके कंधों पर ही परिवार की जिम्मेदारी आ गई है।