नागौर जिले में अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन नीलकंठ’ की साख पर अब सवाल उठने लगे हैं। पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के ठीक 50 मीटर के दायरे में ही खुलेआम डोडा पोस्त और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री हो रही है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यह पूरा नेटवर्क पुलिस की वसूली के संरक्षण में फल-फूल रहा है, जिससे जिले की कानून-व्यवस्था और पुलिस की विश्वसनीयता दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
एसपी कार्यालय के आसपास सक्रिय नशे का नेटवर्क
एसपी मृदुल कच्छवाहा के नेतृत्व में ‘ऑपरेशन नीलकंठ’ को नशे के खिलाफ बड़ा अभियान बताया गया था। पिछले महीनों में कई जगह छापेमार कार्रवाई भी हुई, लेकिन एसपी कार्यालय के नजदीकी इलाके में नशे का कारोबार बेरोकटोक जारी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि दिन-दहाड़े युवा नशीले पदार्थ खरीदते दिखते हैं, वहीं पुलिस की गाड़ियां बिना रुके गुजर जाती हैं। एक निवासी ने कहा कि यह इलाका जैसे पुलिस के लिए ‘नो-गो जोन’ बन गया है। अगर यहां भी नशे का कारोबार रोका नहीं जा सका तो बाकी जगहों पर ऑपरेशन की क्या उपयोगिता रह जाएगी? सूत्रों के अनुसार, नशे के कारोबारी स्थानीय पुलिसकर्मियों को मासिक ‘रकम’ देकर संरक्षण प्राप्त करते हैं। हालांकि एसपी कार्यालय की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
दूसरी ओर पुलिस की कार्रवाइयां जारी
इधर जिले के अन्य इलाकों में पुलिस लगातार नशा विरोधी कार्रवाई कर रही है। 29 अक्तूबर को सदर थाना प्रभारी सुरेश कस्वा की टीम ने रिंग रोड तिराहा सरहद गोगेलाव पर छापा मारा। वहां अंधेरे में नीम के पेड़ के नीचे बैठे संदिग्ध अवतार सिंह (21 वर्ष, निवासी रतनपुरा, संगरिया, हनुमानगढ़) को पकड़ा गया। उसके पास से 24 किलो 250 ग्राम डोडा पोस्त बरामद किया गया। प्रकरण संख्या 194/2025, धारा 8/15 एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। आरोपी से आपूर्ति श्रृंखला का खुलासा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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वहीं, 8 अक्तूबर को भी गोटन थाना प्रभारी सुरेश चौधरी ने मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई कर धनराज (निवासी गोटन) के कब्जे से 1.940 किलो डोडा पोस्त जब्त किया था। इसके बाद प्रकरण संख्या 232/2025, धारा 8/15 एनडीपीएस एक्ट में केस दर्ज हुआ और जांच में उसका सप्लायर विष्णु खारोल (28 वर्ष, निवासी जे.के. रोड, गोटन) भी धारा 8/15 और 29 एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार हुआ। इस प्रकरण की जांच मेडतारोड थाना प्रभारी उर्जाराम कर रहे हैं।
अभियान की साख पर सवाल और जवाबदेही की मांग
इन कार्रवाइयों के बावजूद एसपी कार्यालय के आसपास की अनदेखी पर सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या ‘ऑपरेशन नीलकंठ’ सिर्फ दूरदराज के गांवों तक सीमित रह गया है? नशा मुक्ति से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई तो पूरा अभियान दिखावे तक सीमित रह जाएगा और युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में आती जाएगी।
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