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Suicides in Kota: फंदा लगाया, तो गिरेगा पंखा, बजेगा हूटर

Fri, 31 Mar 2017 11:14 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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suicide
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देश की कोचिंग सिटी कोटा में हॉस्टल में रहनेवाले छात्र यदि पंखे के सहारे फंदा लगाकर आत्महत्या का प्रयास करेंगे, तो पंखा गिर जाएगा और हूटर भी बजेगा।
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हॉस्टल छात्रों में आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए कोटा हॉस्टल एसोसिएशन नए-नए उपाय करने में जुटा हुआ है। कोचिंग छात्रों की आत्महत्याओं को लेकर कोटा शहर लगातार सुर्खियों में रहा है। एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मित्तल ने अमर उजाला को बताया कि एसोसिएशन ने बेंगलुरू की कम्पनी से ऐसा डिवाइस बनवाया है, जो पंखे पर लगाया जाएगा। यदि पंखे पर 20 किलोग्राम से अधिक वजन पड़ा, तो वह पंखा नीचे गिर जाएगा।

एसोसिएशन के अनुसार कोटा में हर साल करीब दो लाख बच्चे कोचिंग लेने पहुंचते हैं। यहां 750 हॉस्टल और 300 से अधिक पीजी हैं। साथ ही, 17 हजार ऐसे मकान हैं, जो किराए पर बच्चों को ठहराते हैं। कोटा में पिछले वर्ष करीब 18 कोचिंग छात्रों ने आत्महत्या की थीं। वहीं, वर्ष 2014 में आत्महत्याओं की संख्या 45 थी।
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मित्तल ने बताया कि डिवाइस तैयार हो गया है, लेकिन सेंसर लगाना बाकी है, जिससे 20 किलो से अधिक भार पंखे पर पड़ते ही हूटर बजने लगेगा। ये डिवाइस लगभग वैसा होगा, जैसा आज कल घर में सामान तोलने के लिए प्लास्टिक के स्प्रिंग लगे तराजुओं का इस्तेमाल हो रहा है। इस डिवाइस को पूरा तैयार होने में करीब दो महीने लग सकते हैं। सेंसर के कारण हूटर बजेगा और संचालक को तेज आवाज के जरिए पता चलेगा कि संबंधित फ्लोर पर कुछ घटना घटी है। संचालक पहुंचकर छात्र से सम्पर्क कर सकेगा।
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एसएमएस बताता है, बच्चा हॉस्टल पहुंचा कि नहीं

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एसोसिएशन के अनुसार बल्क में खरीदने पर फिलहाल बिना सेंसर के डिवाइस की कीमत करीब 750 रुपए प्रति नग आ रही है। सेंसर के साथ कीमत थोड़ी बढ़ जाएगी। पंखा गिरने से छात्र को चोट लगने को लेकर मित्तल का कहना था कि आत्महत्या का प्रयास करने वाले छात्र को चोट लग सकती है, लेकिन उसके प्रयास को विफल कर उसकी जिंदगी को बचाया जा सकता है।

एसोसिएशन ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा के लिए हॉस्टल्स में बायोमेट्रिक मशीनें भी लगाई जा रही हैं। इन मशीनों के जरिए रात को बच्चों के हॉस्टल पहुंचते ही परिजनों के मोबाइल पर मैसेज पहुंच जाता है, जिससे वे निश्चिंत हो जाते हैं। यदि बच्चा हॉस्टल नहीं पहुंचा, तो मैसेज भी नहीं पहुंचेगा। इससे हॉस्टल संचालक के साथ परिजनों को भी बच्चे के हॉस्टल नहीं पहुंचने की जानकारी मिल जाती है।

एसोसिएशन के अनुसार सुरक्षा के लिए अधिकतर हॉस्टल में सीसीटीवी कैमरे भी लगे हुए हैं। एसोसिएशन का कहना है कि कोटा में हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की आत्महत्याओं की घटनाएं लगातार कम हो रही हैं।
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