पढ़ाई का शेड्यूल इतना बिजी की घर भी नहीं जा पाते
उत्तर प्रदेश के इटावा के संदीप तिवारी ने बताया कि 10 महीने की तैयारी का शेड्यूल इतना व्यस्त होता है कि ब्रेक के दौरान घर भी नहीं जा पाते हैं। हमेशा छुट्टियों में हमें पढ़ाई में पिछड़ जाने का डर सताता रहता है। यह ट्रेडमिल पर दौड़ने जैसा है और आप एक कदम भी नहीं चूक सकते। यदि आप दो दिनों की क्लास मिस करते हैं तो आपकी पढ़ाई दो सप्ताह पीछे जा सकती है। संदीप ने बताया कि वो जब से कोटा आए हैं, वो एक बार भी घर नहीं जा पाए। संदीप अप्रैल में कोटा आए थे।
बच्चे दुष्चक्र में फंसकर तनाव में चले जाते हैं
बिहार के मोतिहारी के 17 साल के अनिमेष कुमार भी व्यस्त क्लास शेड्यूल का हवाला देते हैं। अनिमेष नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) की दूसरी बार तैयारी कर रहे हैं। अनिमेष का कहना है कि ये एक दुष्चक्र है। व्यस्त क्लास के बीच तालमेल बिठाने में छात्र फंस जाता है और खुद को दोष देता है और तनाव में चला जाता है।
अनिमेष ने आगे कहा कि 'पढ़ाई का तनाव रियल है। जब एक छात्र चीजों के साथ तालमेल बिठाने में फेल हो जाता है और छूटे हुए लेक्चर का बैगलॉग बढ़ता जाता है। ऐसे में छात्र अपने पढ़ाई के तरीके को दोष देता है और डिप्रेशन में चला जाता है।
मम्मी-पापा का पैसा बेकार न चला जाए
एक अन्य छात्र अफजल ने कहा कि मां-बाप का पढ़ाई में लगाया पैसा बेकार न चला जाए, ऐसे में छात्र और तनाव में रहने लगते हैं। अफजल ने बताया कि 'मैंने सोचा था कि यहां आने के बाद मैं अपनी तैयारी पर अधिक ध्यान दूंगा लेकिन यह पूरी तरह से एक अलग दुनिया है। अब न केवल मुझे खुद सब कुछ मैनेज करना पड़ता है बल्कि मैं यह भी सोचता रहता हूं कि मेरे माता-पिता ने पैसा लगाया है और अगर मैं देने में असमर्थ रहा तो क्या होगा।'
दोस्तों के बीच भी टफ प्रतियोगिता
नाम नहीं बताने की शर्त पर एक छात्र ने बताया कि दो छात्र दोस्त होने के बावजूद एक दूसरे से कॉम्पिटिशन करते हैं। सबमें यही भावना होती है कि कॉम्पिटिशन एक ही सीट के लिए है और यही भावना बच्चों में होमसिकनेस और अवसाद को जन्म देती है।
बिहार के दो और मध्यप्रदेश के एक छात्र ने किया था सुसाइड
कोटा में लगभग दो लाख बच्चे कोचिंग संस्थानों में पढ़ रहे हैं। जिसमें से कम से कम 14 छात्रों ने इस साल सुसाइड कर लिया। पिछले सप्ताह आत्महत्या करने वाले तीन छात्रों में से दो छात्र बिहार के थे। अंकुश आनंद (18) नीट और उज्ज्वल कुमार (17) जेईई की तैयारी कर रहा था। दोनों एक पीजी के कमरे में रहते थे, जहां उन्होंने पंखे में फंदा लगाकर जान दे दी। तीसरा छात्र प्रणव वर्मा मध्यप्रदेश का रहने वाला था, जिसने जहर खाकर जान दे दी।
कोरोना में नहीं आए थे सुसाइड के मामले
2021 में किसी भी छात्र की आत्महत्या की सूचना नहीं मिली थी। कोरोना के कारण कोचिंग सेंटर बंद थे। छात्रों ने अपने घरों से ऑनलाइन क्लास के जरिए पढ़ाई की थी। 2019 में 18 और 2020 में 20 छात्रों ने अपनी जान दे दी।