सुरक्षित रेल संचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे ने उत्तर-पश्चिम रेलवे के जोधपुर सहित चारों मंडलों के पूरे रेलमार्ग को टक्कररोधी कवच प्रणाली से लैस करने के लिए 23 सौ करोड़ रुपए की स्वीकृति दी है। इस परियोजना के तहत लगभग 5,561 किलोमीटर रेलमार्ग पर कवच 4.0 प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिससे सभी रेलमार्ग टक्कररोधी बनेंगे।
उत्तर-पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशिकिरण ने बताया कि रेलवे सुरक्षा को हमेशा प्राथमिकता देता है और संरक्षित रेल संचालन सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक और नवाचारों का उपयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि संरक्षित रेल संचालन में अत्याधुनिक और अपग्रेड सिग्नल प्रणाली अहम भूमिका निभाती है और इसके तहत कवच प्रणाली का कार्य प्रगति पर है।
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि स्वदेशी टक्कररोधी प्रणाली कवच की स्थापना के लिए जोधपुर, अजमेर, जयपुर और अन्य मंडलों में बचे रेल मार्ग में टेंडर प्रक्रिया चल रही है। सभी मंडलों में कवच प्रणाली स्थापित होने के बाद रेलवे सुरक्षा और सुदृढ़ होगी।
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यह स्वदेशी विकसित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जिसे दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ट्रेन की गति की निगरानी और नियंत्रण हेतु डिजाइन किया गया है। सुरक्षा अखंडता स्तर 4 (SIL 4) पर डिजाइन की गई इस प्रणाली का स्तर उच्चतम है।
गौरतलब है कि कवच प्रणाली का विकास 2015 में शुरू हुआ और इसे तीन वर्षों से अधिक समय तक व्यापक परीक्षण के बाद दक्षिण-मध्य रेलवे में स्थापित किया गया। इसका पहला परिचालन प्रमाण पत्र 2018 में प्राप्त हुआ।
दक्षिण-मध्य रेलवे के अनुभव के आधार पर उन्नत संस्करण कवच 4.0 विकसित किया गया, जिसे मई 2025 में 160 किमी प्रति घंटे तक की गति के लिए अनुमोदित किया गया। कवच के सभी पुर्जे स्वदेश में निर्मित किए जा रहे हैं।
रेलवे की इस पहल से उत्तर-पश्चिम रेलवे का रेल नेटवर्क सुरक्षित और अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगा, जिससे संरक्षित रेल संचालन और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।