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पाली: दिव्यांगता प्रमाण पत्र के लिए मांगी 50 हजार की रिश्वत, डॉक्टर और संविदाकर्मी पर एसीबी ने दर्ज किया केस

Thu, 05 Nov 2026 09:08 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पाली

सार

राजस्थान के पाली जिले के बांगड़ अस्पताल में दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। चतुर्थ श्रेणी भर्ती 2024 में दिव्यांगता कोटे से चयनित अभ्यर्थी भूराराम से 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने के बदले 50 हजार रुपये मांगे गए थे।
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(प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जस्थान के पाली जिले में दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। चतुर्थ श्रेणी भर्ती 2024 के तहत दिव्यांगता कोटे में चयनित एक अभ्यर्थी से 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता का प्रमाण पत्र जारी करने के बदले 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बांगड़ अस्पताल के चिकित्सक डॉ. रविंद्र चारण और संविदाकर्मी सुनील परिहार के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है। एसीबी ने रिश्वत मांगने से जुड़ी बातचीत की डिजिटल रिकॉर्डिंग के आधार पर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, रिश्वत लेते हुए आरोपियों को पकड़ने के लिए की गई ट्रैप कार्रवाई सफल नहीं हो सकी।

चतुर्थ श्रेणी भर्ती में चयन के बाद प्रमाण पत्र बनवाने पहुंचा था अभ्यर्थी

जानकारी के अनुसार, चतुर्थ श्रेणी भर्ती 2024 में दिव्यांगता कोटे के तहत चयनित अभ्यर्थी भूराराम 10 अप्रैल को अपना दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए बांगड़ अस्पताल पहुंचा था। वह नियमानुसार मेडिकल बोर्ड से प्रमाण पत्र जारी करवाना चाहता था। अभ्यर्थी ने अपने पुराने दिव्यांगता संबंधी दस्तावेज चिकित्सक डॉ. रविंद्र चारण को दिखाए और मेडिकल जांच कराई।

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जांच के बाद जब वह अस्पताल से लौटने लगा, तो परिसर में ही उसकी मुलाकात संविदाकर्मी सुनील परिहार से हुई। आरोप है कि सुनील ने अभ्यर्थी से कहा कि डॉक्टर उसका केवल 20 प्रतिशत तक का ही दिव्यांगता प्रमाण पत्र बना रहे हैं। यदि वह 40 प्रतिशत से अधिक का प्रमाण पत्र बनवाना चाहता है, तो इसके लिए 50 हजार रुपये देने होंगे। संविदाकर्मी ने रुपये देने पर काम करवाने का भरोसा दिलाया और अपना मोबाइल नंबर भी अभ्यर्थी को दे दिया।

एसीबी में शिकायत, बातचीत की डिजिटल रिकॉर्डिंग से हुआ सत्यापन

पीड़ित अभ्यर्थी ने बताया कि वह स्वयं 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद प्रमाण पत्र जारी करने के बदले रिश्वत मांगे जाने पर उसने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने 11 अप्रैल को इसका सत्यापन कराया। इस दौरान परिवादी और संविदाकर्मी सुनील परिहार के बीच हुई बातचीत रिकॉर्ड कर ली गई। इसके बाद ब्यूरो की टीम ने पूरी गोपनीयता बरतते हुए अभ्यर्थी को डिजिटल वॉइस रिकॉर्डर चलाने की प्रक्रिया समझाई। टीम ने उसके साथ कांस्टेबल सतपाल को भी भेजा। 12 अप्रैल को अस्पताल परिसर में सुनील परिहार और परिवादी भूराराम के बीच व्हाट्सएप कॉल और आमने-सामने हुई मुलाकात के दौरान रिश्वत की रकम से संबंधित बातचीत डिजिटल वॉइस रिकॉर्डर में दर्ज की गई। इस रिकॉर्डिंग को रिश्वत मांगने के आरोपों के सत्यापन का महत्वपूर्ण आधार माना गया।

14 अप्रैल को रिश्वत लेते पकड़ने की कोशिश, लेकिन सफल नहीं हुई ट्रैप कार्रवाई

शिकायत और बातचीत का सत्यापन पूरा होने के बाद एसीबी की टीम ने 14 अप्रैल को ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई। इसके तहत परिवादी भूराराम को रिश्वत की राशि देकर बांगड़ अस्पताल भेजा गया। वहीं, ब्यूरो की टीम भी आसपास सतर्क होकर मौजूद रही, ताकि रिश्वत लेते ही आरोपी को पकड़ा जा सके।
हालांकि, आरोप है कि संविदाकर्मी सुनील परिहार को अस्पताल परिसर में एसीबी की टीम की मौजूदगी का संदेह हो गया। शक होने के कारण उसने परिवादी से रिश्वत की रकम स्वीकार नहीं की और उसे वापस भेज दिया। इस वजह से आरोपी को मौके पर रंगे हाथ पकड़ने की कार्रवाई सफल नहीं हो सकी।

डॉक्टर और संविदाकर्मी के खिलाफ मामला दर्ज, जांच शुरू

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की पाली द्वितीय इकाई के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देरावरसिंह सोढ़ा ने बताया कि शिकायत के सत्यापन के दौरान हुई रिकॉर्डिंग में रिश्वत मांगने से संबंधित बातचीत की पुष्टि हुई है। इसके आधार पर बांगड़ अस्पताल के चिकित्सक डॉ. रविंद्र चारण और संविदाकर्मी सुनील परिहार के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है। दोनों के विरुद्ध मामले की आगे की जांच की जा रही है।

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