भारतीय वायुसेना द्वारा आयोजित बहुराष्ट्रीय वायुसेना अभ्यास तरंग शक्ति-2026 में विश्व की प्रमुख वायुसेनाएं अपनी सामरिक ताकत और साझा युद्ध क्षमता का प्रदर्शन कर रही हैं। भूमध्य सागर में आयोजित वरुणा अभ्यास के सफल समापन के बाद फ्रांसीसी वायु एवं अंतरिक्ष सेना इस बहुराष्ट्रीय आयोजन में हिस्सा ले रही है।
फ्रांस के पेगासे-26 मिशन के अंतर्गत 30,000 किलोमीटर से अधिक की सैन्य तैनाती पूरी करते हुए संयुक्त अरब अमीरात स्थित फ्रांसीसी सैन्य एयरबेस से राफेल लड़ाकू विमानों की विशेष टुकड़ी जोधपुर पहुंची है। जोधपुर के आकाश में जब फ्रांस के राफेल लड़ाकू विमान तेज गति से उड़ान भरते हैं, तो यह नजारा अत्याधुनिक सैन्य तकनीक, गति और भारत-फ्रांस की अटूट रणनीतिक मित्रता की मिसाल पेश करता है।
फ्रांसीसी राफेल और नाइट ऑपरेशन्स का रोमांच
तरंग शक्ति अभ्यास के दौरान जोधपुर एयरबेस पर दिन के साथ-साथ रात के समय भी हवाई गतिविधियां और अभ्यास निर्बाध रूप से जारी हैं। इस बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास के दौरान बेहद रोमांचक और मानवीय पहलू भी सामने आ रहे हैं। इस आयोजन में हिस्सा ले रही फ्रांसीसी वायु एवं अंतरिक्ष सेना ने सोशल मीडिया मंच पर राफेल लड़ाकू विमान और अपने ग्राउंड क्रू की एक आकर्षक तस्वीर साझा की है। रात में चलाए जाने वाले अभियानों के दौरान की इस तस्वीर के साथ फ्रांसीसी वायुसेना ने लिखा कि भारत की रात की शांति में जेट इंजनों के आफ्टरबर्नर की भीषण गर्जना और अभ्यास शुरू होने से ठीक पहले का यह समय अत्यंत विशिष्ट अनुभव देता है। इस विशेष क्षण में ग्राउंड क्रू और पायलट आपस में गहरा तालमेल बिठाते हैं, जो तरंग शक्ति अभ्यास को विशिष्ट भावुक और कलात्मक पहचान प्रदान करता है। जोधपुर में रात के अंधेरे में राफेल की गर्जना और ग्राउंड क्रू का समर्पण इस युद्धाभ्यास के मुख्य आकर्षणों में शामिल है।
अंतरराष्ट्रीय भाईचारे और सामरिक समझ की मजबूती
भारतीय वायुसेना के आधिकारिक वक्तव्य में बताया गया है कि पहली टेक-ऑफ से लेकर सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाए गए प्रत्येक मिशन तक यह अभ्यास केवल सैन्य बल का प्रदर्शन मात्र नहीं है। यह आयोजन हवाई क्षमता, परस्पर समन्वय और अंतरराष्ट्रीय भाईचारे को वास्तविक धरातल पर एक साझा मंच पर लेकर आया है। जोधपुर के आसमान में लगातार जारी उड़ानों, भाग लेने वाले देशों के जांबाज पायलटों के बीच पेशेवर संवाद और साझा अनुभवों के आदान-प्रदान से यह आयोजन प्रतिभागी राष्ट्रों के बीच रणनीतिक संबंधों को अत्यधिक सुदृढ़ कर रहा है। इसके साथ ही यह युद्धाभ्यास भविष्य की जटिल सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए परस्पर सामरिक समझ को एक नए शिखर पर पहुंचा रहा है। विभिन्न देशों के पायलट एक साथ उड़ान भरकर एक-दूसरे की कार्यशैली और युद्ध तकनीकों को समझ रहे हैं।
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जर्मन ए-400M एटलस की विशेष क्षमताएं
इस बहुराष्ट्रीय अभ्यास में जर्मन वायुसेना की भागीदारी भी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। जर्मनी ने इस युद्धाभ्यास के लिए जोधपुर एयरबेस पर अपने अत्याधुनिक A400M एटलस परिवहन विमान को तैनात किया है। यह विशालकाय सैन्य परिवहन विमान भारी सैन्य साजो-सामान और सैनिकों की तेजी से आवाजाही के साथ-साथ जटिल लॉजिस्टिक्स तथा एयरलिफ्ट ऑपरेशन्स को अंजाम देने के लिए प्रसिद्ध है। चार टर्बोप्रॉप इंजनों से सुसज्जित A400M एटलस विमान लगभग 37 टन तक का पेलोड ले जाने में पूरी तरह सक्षम है। इस विमान की सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता यह है कि यह अपेक्षाकृत छोटे और कच्चे रनवे से भी सुगमता से अपने ऑपरेशन संचालित कर सकता है। यही क्षमता इसे अत्यंत विषम तथा कठिन सैन्य परिस्थितियों में बेहद उपयोगी बनाती है। इसके अतिरिक्त, इस विमान में हवा में ही दूसरे लड़ाकू विमानों में ईंधन भरने की महत्वपूर्ण क्षमता भी मौजूद है, जिससे लंबी दूरी के रणनीतिक हवाई अभियानों में इसकी उपयोगिता कई गुना बढ़ जाती है।