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Year Ender 2023: खत्म हुआ गहलोत-वसुंधरा का युग, इन वजहों से पूरे साल सुर्खियों में छाया रहा राजस्थान

Tue, 26 Dec 2023 03:09 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

Year Ender 2023: साल 2023 अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। लेकिन 2023 राजस्थान के लिए कई मायनों में खास रहा। इस साल प्रदेश की सियासी गलियारों में कई उतार चढ़ाव देखने को मिले।
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राजस्थान राजनीति 2023 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश के पश्चिमी छोर पर स्थित सूबा राजस्थान में पिछले 30 साल से सत्ता की धुरी दो नेताओं के हाथों में रही है। दोनों के बाच पिछले तीन दशक में सत्ता की बागडोर रही है। लेकिन साल 2023 का विधानसभा चुनाव दोनों कद्दावर नेताओं के अवसान की तरह देखा जा रहा है।

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माना जा रहा है कि राजस्थान की दो बार सीएम रह चुकीं बीजेपी उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे और तीन बार सीएम रह चुके अशोक गहलोत की क्षेत्रीय राजनीति में दरार आ गई है। ऐसे में पूरी संभावना है कि दोनों दिग्गज नेता अब राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में उभरेंगे।

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पांच बड़े राजनीतिक घटनाक्रम, जो सबसे ज्यादा चर्चिच रहे
बीजेपी स्पष्ट बहुमत से जीता
पांच साल तक विपक्ष में बैठी भारतीय जनता पार्टी के लिए भी ये साल बहुत अच्छा रहा है। हाल ही में हुए पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने राजस्थान समेत तीन राज्यों में प्रचंड बहुमत से जीत हासिल की है। राजस्थान में बीजेपी की इस जीत से सरकार बदलने की परंपरा कायम रही।

नए मुख्यमंत्री बने भजनलाल शर्मा
राजस्थान में सांगानेर से पहली बार चुनकर आए विधायक भजनलाल शर्मा को प्रदेश के मुख्यमंत्री की मिली कमान ने सभी को चौंका दिया। ब्राह्मण समुदाय से आने वाले शर्मा इससे पहले प्रदेश भाजपा में महामंत्री का पद संभाल रहे थे, वह आरएसएस की पृष्ठभूमि से आते हैं।

कटारिया बने राज्यपाल
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे गुलाबचंद कटारिया को असम के राज्यपाल की बड़ी जिम्मेदारी से नवाजा गया। इस कारण बीजेपी को नेता प्रतिपक्ष पद पर कटारिया की जगह वरिष्ठ विधायक राजेंद्र राठौड़ को जिम्मेदाई देनी पड़ी। वहीं, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया को पार्टी ने उप नेता प्रतिपक्ष का जिम्मा दिया।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बदले
साल 2023 के शुरुआत में राजस्थान बीजेपी में बड़ा बदलाव हुआ। मार्च महीने में प्रदेशाध्यक्ष पद से सतीश पूनिया को हटाकर चित्तौड़गढ़ से दो बार के सांसद सीपी जोशी को अध्यक्ष की जिम्मेदारी दे दी गई।

लाल डायरी विवाद
इस साल राजस्थान विधानसभा में लाल डायरी ने प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया। मंत्री पद से हटाए गए विधायक राजेंद्र गुढ़ा लाल डायरी को लेकर विधानसभा पहुंचे थे। गुढ़ा को जबरन सदन से निकाल दिया गया और डायरी का एक हिस्सा छीन लिया गया। ये मुद्दा काफी चर्चा में रहा।



राजस्थान में साल 2023 ने कई सौगातें भी दी हैं, तो कई गम भी यह साल देकर गया है। कई हस्तियां इस दुनिया से चली गईं तो कुछ घटनाओं ने प्रदेशवासियों को हमेशा के लिए भाव विभोर कर दिया। ऐसी की कुछ घटनाओं की और आपका ध्यान दिलाते हैं, जो साल 2023 में खास रहीं।

  • साल 2023 में सबसे अहम विधानसभा चुनाव रहे, जिसमें कांग्रेस के हाथ से सत्ता गई तो प्रदेश में कमल खिल उठा। पीएम मोदी गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित कई बड़े दिग्गजों की सभाएं हुई और चुनाव परिणाम चौकाने वाले आए। 115 सीटों के साथ प्रदेश में बीजेपी ने प्रचंड जीत का दर्ज की।
  • चौंकाने वाला निर्णय मुख्यमंत्री का भी रहा, जिसमें भजनलाल शर्मा को सीएम बनाया गया और कई दिग्गजों के भविष्य का सूर्यास्त हो गया तो वहीं इस विधानसभा में कांग्रेस और बीजेपी के कई दिग्गज चुनाव हार गए।
  • राजस्थान में भारत जोड़ो यात्रा ने झालावाड़ से चार दिसंबर शाम को प्रवेश किया और उसके बाद कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, दौसा और अलवर होते हुए हरियाणा से गुजर गई। कुल 18 दिन तक यह यात्रा राजस्थान में रही, जहां कई सभाएं की गईं। कई संदेश दिए गए तो सरकार साथ चल रही थी।
  • इस दौरान कई लोगों के मौके पर ही काम हो गए। अशोक गहलोत, सचिन पायलट सहित देश के कई दिग्गज नेता इस यात्रा में शामिल रहे।
  • राजस्थान में कई हस्तियों को कई बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई, जिसमें झुंझुनूं जिले ने देश को नया उपराष्ट्रपति दिया। लोकसभा अध्यक्ष के बाद उपराष्ट्रपति बनने से प्रदेश गौरवान्वित हुआ।
  • विपक्ष की उम्मीदवार मारग्रेट अल्वा को 346 वोटों के बड़े अंतर से धनकड़ ने हराया तो प्रदेश में जश्न का माहौल हो गया। धनखड़ को 528 जबकि अल्वा को महज 182 वोट मिले।
  • धनखड़ जब चर्चाओं में आए जब पश्चिम बंगाल में हुए चुनाव और उससे पहले ममता बनर्जी से उनकी खूब सीयासी नोकझोंक होती रही। उसके बाद वह चर्चा में आए और उन्हें बतौर राजनैतिक कौशल का लाभ मिला और उपराष्ट्रपति का गौरवमयी पद मिला।

गौरतलब है पूर्व राजस्थान सीएम अशोक गहलोत और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे दोनों का चुनाव नहीं हारने का रिकॉर्ड हैं। पांच साल के अंतराल में पार्टी हारती-जीतती रही, लेकिन दोनों नेता अपना चुनाव कभी नहीं हारे। दोनों का वर्तमान में भी अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र और जनता में जलवा ज्यों का त्यों बरकरार है।



सरदारपुरा और झालरापाट सीट पर जलवा कायम
साल 2023 विधानसभा चुनाव में अशोक गहलोत सरदारपुरा सीट और वसुंधरा राजे झालरापाटन सीट से फिर चुनाव जीते। कह सकते हैं कि साल 1999 से अशोक गहलोत का जलवा विधानसभा चुनाव में सरदारपुरा में और 2003 से वसुंधरा झालरापाटन में जलवा बरकरार है। लेकिन अब उनके प्रदेश की राजनीति में लौटने पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

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गहलोत के चौथी बार सीएम बनने को लेकर आशंका थी
साल 2023 में अगर कांग्रेस चुनाव जीतती, तब भी अशोक गहलोत के चौथी बार सीएम बनने को लेकर आशंका थी। ठीक ऐसी ही संभावना वसुंधरा राजे के साथ भी हुआ। वसुंधरा की पार्टी चुनाव में जीती, सारे दवाबों के बावजूद पार्टी ने उन्हें सीएम नहीं बनाया। वसुंधरा एक ज़िद्दी नेता हैं, जो शीर्ष नेतृत्व पर दबाव बनाने में माहिर हैं, लेकिन मोदी युग में उनकी एक नहीं चली।



बिना लड़े हार जाते हैं उम्मीदवार
पिछले 20 साल का रिकॉर्ड खंगालेंगे तो पाएं कि दोनों की परंपरागत सीट पर अक्सर पार्टियां को कमज़ोर कैंडिडेट ही खड़ा करना पड़ता है। क्योंकि इन कद्दावरों के आगे दूसरे प्रत्याशियों का चेहरा फीका पड़ जाता है। यह परंपरा 2023 विधानसभा में भी कायम रहा और दोनों दिग्गज नेता आसानी से अपनी सीट पर चुनाव जीत गए।

अविजित रहीं वसुंधरा, छठीं बार अजेय रहे गहलोत 

  • साल 2018 में मानवेंद्र सिंह जसोल को कांग्रेस ने झालरापाटन से टिकट देकर वसुंधरा को कड़ी चुनौती देने की सोची थी, लेकिन महारानी के सामने वो टिक नहीं पाए।
  • इस चुनाव में भी वसुंधरा ने कांग्रेस उम्मीदवार रामलाल को चारो खाने चित्त कर दिया और फिर साबित किया कि उनके गढ़ में उन्हें कोई हरा नहीं सकता।
  • इससे पहले सचिन पायलट की माताजी रमा पायलट ने भी 2003 में झालरापाटन से चुनाव लड़ा था, लेकिन रमा पायलट को भी वसुंधरा से हार का मुंह देखना पड़ा था।
  • अशोक गहलोत ने 2003 विधानसभा चुनाव में बीजेपी के महेंद्र झाबक को 24000 वोटों के अंतर से हराया था।
  • साल 2008 में बीजेपी के राजेंद्र गहलोत को 16000 वोटों से हराया था और 2013 और 2018 में शंभू सिंह खेतासर को 18000 वोटों से हराया था।
  • साल 2023 में अशोक गहलोत ने छठी बार जीत दर्ज की, उन्होंने भाजपा उम्मीदवार महेंद्र राठौड़ को भारी मतों से हराकर साबित कर दिया कि उनमें अभी दम बाकी है।
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