राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के चर्चित ओएसडी लोकेश शर्मा जो सीएम के सोशल मीडिया का काम भी संभालते हैं। उन्होंने बीजेपी इंडिया के इस ट्वीट को टैग करते हुए लिखा, 220 करोड़ लोगों को मुफ्त वैक्सीन...? वाकई मोदी है तो मुमकिन है। वैसे आबादी कितनी है देश की...?
सीएम अशोक गहलोत के ओएसडी के इस तीखे कटाक्ष और तंज पर बीजेपी ने अपना वह ट्वीट ही डिलीट कर दिया। इसके बाद सीएम गहलोत के ओएसडी ने फिर से बीजेपी को आड़े हाथों लेते हुए लिखा कि देश की आबादी क्या पूछ ली बीजेपी इंडिया ने ट्वीट ही डिलीट कर दिया। इसके बाद गलती को झेंपते हुए बीजेपी ने नया संशोधित ट्वीट किया, जिसमें लिखा, कभी सोचा था? 220 करोड़ कोरोना के टीके लोगों को मुफ्त लगाए जाएंगे। मोदी है तो मुमकिन है।
जान लीजिए क्या हुई गलती...
बीजेपी ने पहले 220 करोड़ लोगों को कोरोना के टीके लिखने की बात करते हुए इसे मोदी है तो मुमकिन है बता दिया था। लेकिन फैक्चुअली यह गलत था। क्योंकि भारत देश की इतनी आबादी ही नहीं है। कोरोना की 220 करोड़ डोज लिखने की बजाय 220 करोड़ लोगों के टीके लिखने की बात जब गलत साबित हुई, तो आनन-फानन में संशोधित ट्वीट किया गया।
सोशल मीडिया पर खूब हो रही किरकिरी...
इस पूरे घटनाक्रम पर बीजेपी की सोशल मीडिया पर खूब किरकिरी हुई। लोग तरह-तरह के कमेंट्स कर रहे हैं। अनिता मीणा नाम की ट्वीटर यूजर ने लिखा, पता नहीं अभी तक तो कितने ट्वीट डिलीट करेंगे ये लोग। रोहित कुमार ने लिखा, भाई साहब इनकी फर्जी खबरों पर हम सबको डंके की चोट करनी है और बीजेपी को झूठे प्रचार का मुंहतोड़ जवाब देंगे, तब ही इनका असली चेहरा बेनकाब होगा। कांता सोलंकी ने लिखा, ये तो होना ही था।
वहीं, कविता सिंघमार ने लिखा, बिना सोचे समझे कुछ भी लिखेंगे, तो डिलीट करना ही पड़ेगा। कपिल बिश्नोई ने लिखा, कहां से आते हैं ये लोग...। बंसी टाक पीपाड़ ने लिखा, भैयाजी बीजेपी अब तक जनता को गुमराह करते आ रही है। अब जनता इतके झांसे में नहीं आएगी। ये लोग झूठ का सहारा लेकर चल रहे हैं। जनता इनते झूठ को नकार चुकी है। फिर से कांग्रेस सरकार आएगी।
एडवोकेट नीमा वर्मा ने लिखा, फिर डिलीट। प्यारेलाल वर्मा नाम के यूजर ने लिखा, सवाल पूछोगे बीजेपी से तो ये ही होगा, अब इनके पास बोलने के लिए बचा ही क्या है। कीर्ति सिंह ने जीआईएफ पोस्ट किया, जिसमें लिखा है ऐसा लगता है बड़े इज्जत से बेइज्जती हुई है। मनीषा बावरी ने लिखा, दिन ही खराब निकल आए हैं इनके, इन्हें पता नहीं है आबाकी का।