मिठाई और कैटरिंग कारोबार पर पड़ेगा चीनी की बढ़ती कीमतों का असर
चीनी के बढ़ते दाम अब खरीददार और बेचने वाले दोनों के लिए परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। मिठास के लिए इस्तेमाल होने वाली शक्कर की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर मिठाइयों और कैटरिंग कारोबार पर पड़ रहा है। जयपुर में हलवाई और कैटरर्स कल्याण समिति के प्रतिनिधियों ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि यदि कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहा तो त्योहारी सीजन में आम आदमी का त्योहार पहले की तुलना में हल्का रह सकता है।
कैटरिंग एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के मुताबिक त्योहार होने के कारण गरीब से गरीब परिवार भी मिठाई जरूर खरीदेगा लेकिन बढ़ी कीमतों का असर उसकी खरीद की मात्रा पर पड़ेगा। जो ग्राहक पहले एक किलोग्राम मिठाई खरीदता था, वह अब आधा किलोग्राम में ही संतुष्ट हो सकता है। प्रतिनिधियों ने बताया कि शक्कर के दाम बढ़ने के कारण मिठाइयों की कीमतों में करीब 10 से 12 प्रतिशत तक इजाफा हो चुका है।
शादियों के सीजन को लेकर सबसे बड़ी चिंता
कैटरर्स के सामने आगामी शादी सीजन को लेकर भी बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रतिनिधियों ने बताया कि कैटरिंग कारोबार में कई बार महीनों पहले बुकिंग होती है और उसी समय ग्राहक के साथ रेट तय कर दिए जाते हैं। ऐसे में कच्चे माल की कीमत यदि महज कुछ दिनों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ जाती है तो पुराने रेट पर काम करना मुश्किल हो जाता है।
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एक कैटरर ने बताया कि नवंबर की चार बुकिंग पहले से तय हैं। ग्राहकों से रेट बढ़ाने की बात की गई लेकिन उन्होंने साफ इंकार कर दिया। अब उनके सामने या तो पुरानी कीमत पर बढ़ी लागत के साथ काम करने या बुकिंग छोड़ने का विकल्प है। दोनों ही स्थितियों में नुकसान कारोबारियों का है और स्टाफ का खर्च निकालना भी मुश्किल हो सकता है।
ग्राहक भी घटा रहे कार्यक्रम का आकार
कैटरर्स ने बताया कि परेशानी केवल कारोबारियों तक सीमित नहीं है। महंगाई का असर ग्राहकों के कार्यक्रमों पर भी दिखाई दे रहा है। पहले जो लोग 500 लोगों के कार्यक्रम की योजना बनाते थे, वे अब उसे घटाकर 300 लोगों तक सीमित कर रहे हैं।
प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि शक्कर की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो मिठाई की संख्या थाली में कम होती जाएगी और आने वाले समय में मिठाई केवल प्रतीकात्मक रूप से परोसी जाने की स्थिति भी बन सकती है। बढ़ती कीमतें त्योहारों की मिठास के साथ रिश्तों की मिठास पर भी असर डाल रही हैं।