राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के चुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरसीए चुनाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
डोटासरा ने निकाय चुनाव के बाद आरसीए चुनाव को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव में भाजपा नेताओं और मंत्री पुत्रों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आरसीए को राजनीतिक अखाड़ा बना दिया गया है। डोटासरा के अनुसार, प्रत्याशियों ने चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त भाजपा नेता एवं राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी पर सरकार के इशारे पर मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया है।
डोटासरा ने दावा किया कि मतदान के दौरान जहां मतदाताओं को बैठना चाहिए था, वहां चतुर्वेदी मौजूद थे और मतदाताओं पर दबाव बनाकर एक पक्ष के समर्थन में मतदान कराया गया। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि डराने-धमकाने और सरकार के पसंदीदा व्यक्ति को जिताना ही उद्देश्य था तो चुनाव कराने की जरूरत क्यों पड़ी।
उन्होंने आरसीए से जुड़े नवनिर्मित जिला क्रिकेट संघों बालोतरा, डीडवाना-कुचामन और खैरथल-तिजारा को चुनाव प्रक्रिया से दूर रखने का भी आरोप लगाया। डोटासरा ने कहा कि इन संघों को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि निर्णय पहले से तय था तो चुनाव की पूरी प्रक्रिया केवल दिखावा क्यों की गई।
डोटासरा के आरोपों पर अरुण चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि किसी पर आरोप लगाने से पहले इतिहास पढ़ लेना चाहिए। चतुर्वेदी ने 2009 के आरसीए चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि उस समय सीपी जोशी आरसीए अध्यक्ष बने थे और राजस्थान सरकार के कई मंत्री चुनाव के दौरान वहां मौजूद थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय विपक्ष के प्रत्याशी पर दबाव बनाया गया, जिसके कारण उन्हें नाम वापस लेना पड़ा।
चतुर्वेदी ने 2019-20 के आरसीए चुनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय वैभव गहलोत के खिलाफ रामेश्वर डूडी चुनाव लड़ रहे थे और उनके नामांकन को लेकर विवाद हुआ था। चतुर्वेदी ने दावा किया कि उस दौरान भी सरकार के मंत्रियों की मौजूदगी और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठे थे। उन्होंने यह भी कहा कि तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने उस समय अशोक गहलोत पर पुत्र मोह को लेकर टिप्पणी की थी।
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मौजूदा चुनाव को लेकर चतुर्वेदी ने कहा कि इस बार किसी प्रकार का दबाव नहीं था और चुनाव अधिकारी ने कानूनी प्रावधानों के तहत पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से चुनाव संपन्न कराया। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को भी खारिज किया।
चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया कि चुनाव से पहले वह आरसीए परिसर में गए थे और कैंटीन में बैठे थे, लेकिन मतदान के दौरान एक मिनट के लिए भी मतदान क्षेत्र के आसपास नहीं गए। उन्होंने डोटासरा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह अपने दायित्व, कानूनी मर्यादाओं और चुनाव संबंधी प्रतिबंधों से पूरी तरह अवगत हैं। अंत में उन्होंने डोटासरा पर निशाना साधते हुए कहा कि आरोप लगाकर अपनी खीझ निकालने का प्रयास किया जा रहा है।