राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने भले ही इस्तीफा नहीं दिया, लेकिन उन्होंने अपनी सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल बंद कर दिया है। सरकारी काम-काज वाली फाइलों से भी दूरी बना ली है। राजस्थान के सियासी गलियारों में अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या किरोड़ीलाल मीणा सच में इस्तीफा देने जा रहे हैं या फिर ये उनकी दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा भर है। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी से जब इस बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, ऐसा कुछ नहीं है, इस पर बैठकर बात करेंगे।
डॉ. किरोड़ीलाल मीणा के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल पूछ रही है। वहीं, किरोड़ीलाल मीणा ने अब तक इस्तीफा भले नहीं दिया है। लेकिन सरकारी काम-काज से दूरी बना ली है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या किरोड़ीलाल मीणा इस्तीफा देंगे या सिर्फ भजनलाल सरकार पर दबाव बनाने के लिए वे यह सब कर रहे हैं। हालांकि, बीजेपी के सूत्रों की माने तो किरोड़ीलाल मीणा सिर्फ दबाव की राजनीति कर रहे हैं। लेकिन किरोड़ीलाल मीणा के नजदीकी लोगों का कहना है, उन पर इस्तीफा देने का दबाव बढ़ रहा है।
हालांकि, किरोड़ीलाल मीणा को मनाने के लिए बीजेपी के स्तर पर अब तक कोई बातचीत भी नहीं हुई है। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी से जब इस बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने मीडिया से कहा कि आप क्यों उनके पीछे पड़े हो। उन्होंने कहा कि किरोड़ीलाल मीणा बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं और इस मामले में बैठकर बातचीत की जाएगी।
गौरतलब है कि लोकसभा चुनावों से पहले किरोड़ीलाल मीणा ने अपने समर्थकों के बीच यह एलान किया था कि दौसा सीट पर बीजेपी हारती है तो वे इस्तीफा दे देंगे। लोकसभा चुनावों में बीजेपी दौसा सहित पूर्वी राजस्थान की ज्यादातर सीटों पर बुरी तरह हार गई। कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बयान दिया कि किरोड़ीलाल मीणा थूक कर नहीं चाटते वे जरूर इस्तीफा देंगे। किरोड़ीलाल मीणा ने इस्तीफा तो नहीं दिया, लेकिन उनका एक ट्वीट बहुत वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने लिखा, रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई। उनके इस ट्वीट के बाद इस बात की चर्चाएं तेज हो गई कि किरोड़ीलाल मीणा देर सवेर इस्तीफा देंगे।