डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने शुक्रवार को मीणा हाईकोर्ट में बड़े सियासी संकेत दिए हैं। उन्होंने विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर दौसा में मीणा हाईकोर्ट में अपने समर्थकों से कहा- मैंने भजनलाल सरकार के मंत्री पद को इसलिए ठोकर मार दी क्योंकि जहां मैं 45 साल से सेवा कर रहा हूं, उन लोगों ने मेरी बात नहीं रखी।
हालांकि किरोड़ीलाल मीणा के इस्तीफे की बात नई नहीं है, इसका ऐलान वे पहले ही कर चुके हैं लेकिन तब उन्होंने इस्तीफे की वजह अपने वचन को बताया था और यह भी कहा था कि संगठन और सीएम से कोई शिकायत नहीं है लेकिन अब उनकी नाराजगी खुलकर सामने आई है। जिसमें वे यह कह रहे हैं कि पार्टी ने उनकी बात नहीं रखी।
दरअसल किरोड़ीलाल मीणा की सरकार से यह भी शिकायत थी कि जिन लोगों के खिलाफ उन्होंने विपक्ष में रहते आंदोलन किए थे, उन पर कार्रवाई नहीं की गई। योजना भवन में कैश और गोल्ड मिलने का मामला हो या फिर पेपर लीक मामले में बड़े नेताओं पर कार्रवाई की बात हो। पिछले दिनों मीणा पेपर लीक के संबंध में सीधे एसीबी तक पहुंच गए थे, जबकि प्रदेश की सत्ता में उन्हीं की सरकार है।
क्या इससे नाराज हुए किरोड़ी?
पिछले दिनों मंत्री पद से इस्तीफे का सार्वजनिक ऐलान करने के बाद किरोड़ीलाल मीणा ने दिल्ली जाकर बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्ढा से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद उन्होंने कहा था- 'जेपी नड्डा ने बुलाया था। कुछ ऐसी बातें हुई हैं, जिन्हें मैं बताना नहीं चाहता। इस्तीफा बरकरार रखेंगे या नहीं? इस सवाल पर उन्होंने कहा, यह फैसला करना पार्टी का काम है, जनता के बीच में वचन दिया था कि अगर मैं ईस्टर्न राजस्थान की सीटें हार गया तो मैं मंत्री पद छोड़ दूंगा और मैंने वह छोड़ दिया है। इस्तीफे की कॉपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के पास भी है, उन्होंने कुछ बातें की हैं और 10 दिन बाद बुलाया है। मेरा कोई दुराग्रह नहीं है। न ही मैं पार्टी की लाइन तोड़ने वाला हूं। बस केवल इतना सा ही है। संगठन और सीएम से कोई शिकायत नहीं है। सबका अच्छा प्यार और सहयोग है। इतना ही है कि जनता के बीच बोला था इसलिए इस्तीफा देना पड़ा।' इस घटना को महीने भर से ज्यादा समय हो गया लेकिन नड्डा से दोबारा उनकी कोई मुलाकात नहीं हुई।