लोकसभा चुनावों की तैयारियों के लिए शुक्रवार को राजधानी जयपुर के एक बड़े होटल में भाजपा के पार्टी पदाधिकारियों और अन्य नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश पार्टी अध्यक्ष सीपी जोशी, राजस्थान प्रभारी अरुण सिंह, छत्तीसगढ़ प्रभारी ओम माथुर, केंद्रीय मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत, अर्जुनराम मेघवाल, कैलाश चौधरी, विधानसभा में सरकारी सचेतक जोगेश्वर गर्ग, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ समेत कई नेता मौजूद रहे।
इन सारे नेताओं के बीच राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इस बैठक में शामिल नहीं हुईं। राजस्थान में भाजपा की जीत और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के शपथ ग्रहण के बाद यह तीसरी बार है, जब वसुंधरा राजे पार्टी की बैठक और मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुईं। बैठक में वसुंधरा राजे की अनुपस्थिति से सवाल उठने लगा है कि क्या वसुंधरा पार्टी से नाराज हैं? या फिर प्रदेश भाजपा में कोई गुटबाजी चल रही है। वसुंधरा की गैरमौजूदगी को लेकर ये सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के जयपुर प्रवास के दौरान हुई पार्टी की बैठक से भी किनारा कर लिया था।
हाल ही में आईजी-डीजी कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के जयपुर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने पार्टी कार्यालय में नवनिर्वाचित विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों के साथ ढाई घंटे तक बैठक की थी, लेकिन इस बैठक में भी वसुंधरा राजे शामिल नहीं हुई थीं, जबकि पार्टी के जयपुर कार्यालय में प्रधानमंत्री की यह पहली बैठक थी। शहरी विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह ने बताया कि बैठक में सभी मंत्री, विधायक और पार्टी पदाधिकारी मौजूद थे लेकिन किन्हीं पारिवारिक कारणों से वसुंधरा राजे बैठक में मौजूद नहीं थीं।
शुक्रवार को चुनाव तैयारियों को लेकर हुई बैठक में वसुंधरा राजे के शामिल नहीं होने का कारण उनकी बहू की तबीयत खराब होना बताया जा रहा है। लेकिन तीन बड़े मौकों पर वसुंधरा की गैरमौजूदगी भाजपा में गुटबाजी और अंदरूनी कलह की ओर इशारा करती है। कहीं झालावाड़ में पार्टी से रिटायरमेंट को लेकर किया गया उनका मजाक सही साबित तो नहीं होने वाला? या फिर कहीं कुछ और ही बात है।