पहले चरण के मतदान में केवल दो सप्ताह का समय बाकी है लेकिन प्रदेश के गांवों और ढाणियों में अब तक चुनावी रंग जमता हुआ नजर नहीं आ रहा है।
हालिया विधानसभा चुनावों के दौरान जहां पूरा प्रदेश चुनावी रंग में रंगा हुआ था, वहीं इन चुनावों में माहौल ठंडा दिखाई दे रहा है। उम्मीदवार भी इस बार छोटी सभाओं और बैठकों पर ही जोर दे रहे हैं।
पिछले चुनावों की प्रचार सामग्री में जहां मोदी की तस्वीर वाली टी शर्ट, मुखौटों और दुपट्टों की भारी मांग रही थी वहीं इन चुनावों में ये सब गायब है। पोस्टर, बैनर, टी शर्ट, साफों की बिक्री नहीं के बराबर रह गई है।
गृह मंत्री अमित शाह ने भी जोधपुर और जयपुर की बैठकों में पार्टी कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दिया था कि मतदाताओं को लगता है कि केंद्र में फिर से भाजपा आने वाली है वे चाहे वोट करें, ना करें। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे मतदाताओं को घर से निकलकर वोट डालने के लिए प्रेरित करें।
इधर लोकसभा चुनावों से पहले खाते सीज होने का हवाला देते हुए कांग्रेस पल्ला झाड़ रही है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वेदी ने बताया कि हम जनता की पार्टी हैं और जनता के भरोसे ही चुनाव लड़ रहे हैं। चुनावों से ऐन पहले हमारे बैंक खाते बंद कर दिए गए हैं इसलिए हम तो जनता से वोट और आर्थिक मदद दोनों ही मांग रहे हैं। लेकिन वास्तविकता देखें तो कांग्रेस के कई प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ने की बात कहकर टिकट वापस कर चुके हैं और जो लड़ रहे हैं, वो जनता से वोट के साथ आर्थिक मदद भी मांग रहे हैं।
जो भी हो अब तक ठंडे पड़े प्रचार में रंग भरने के लिए भाजपा अपने स्टार प्रचारकों की सभाओं के साथ ही प्रदेश के दूर दराज के आंतिरक इलाकों में नुक्कड़ नाटक, लोक गायन, कठपुतली, जादूगर और बहरूपिया विधाओं के कलाकारों को सांस्कृतिक प्रचार के लिए भेजने की तैयारी कर रही है। ये दल गांव-गांव जाकर प्रदेश और केंद्र सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी मतदाता तक पहुंचाएंगे।