प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद डोटासरा पर क्या एक्शन होगा? क्या उन्हें निलंबित किया जाएगा। स्पीकर वासुदेव देवनानी यह कह चुके हैं कि डोटासरा ने उनके खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया है इसलिए वे इस सदन के सदस्य बने रहने लायक नहीं हैं। पिछले बजट सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर को 6 महीने के लिए निलंबित किया गया था तो स्पीकर ने कहा था कि भाकर ने उन्हें उंगली दिखाई, मार्शल का हाथ काटा और निलंबन के बाद भी बाहर नहीं गए। इसके बाद प्रस्ताव लाया गया और उनका 6 महीने के लिए निलंबन हुआ।
अब डोटासरा पर एक्शन की चर्चा है, स्पीकर ने शुक्रवार को सत्ता पक्ष से कहा था कि आप प्रस्ताव लाइए फिर नियमों के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी। डोटासरा पर आरोप है कि वो हंगामा करते हुए डायस की तरफ बढ़े और सदन स्थगित होने के बाद उन्होंने स्पीकर के लिए तथाकथित कुछ अपशब्द भी कहे। हालांकि डोटासरा इससे साफ इनकार कर चुके हैं और उन्होंने कहा कि इसका कोई वीडियो या ऑडियो हो तो सदन में लाया जाए इसके बाद स्पीकर जो कहेंगे वह करने के लिए तैयार हैं।
विधायक के निलंबन पर क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट
बीते दिनों महाराष्ट्र की विधानसभा में भी ऐसा घटनाक्रम सामने आया था। जिसके बाद स्पीकर ने 12 विधायकों को एक साल के लिए निलंबित कर दिया था। ये 12 विधायक निलंबन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। वहां कोर्ट ने कहा था कि ये संविधान के मूलभूत ढांचे के खिलाफ है और इस तरह मेजोरिटी के प्रस्तावों से किसी सदस्य को लंबे समय तक निलंबित करना लोकतंत्र के लिए खतरा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक साल के लिए विधानसभा से निलंबन निष्कासन से भी बदतर है, क्योंकि इसके परिणाम बहुत भयानक हैं। इससे सदन में प्रतिनिधित्व का किसी निर्वाचन क्षेत्र का अधिकार प्रभावित होता है। कोर्ट ने कहा था कि निलंबन के कारण 12 निर्वाचन क्षेत्र एक साल तक प्रतिनिधित्व के बिना रह गए। वहीं, स्पीकर की शक्तियों के अनुसार किसी भी वजह से अगर किसी को निलंबित करना पड़े तो वह उसे बचे हुए सत्र या फिर अगली पांच बैठकों तक ही रोका जा सकता है।