इन दिनों आप किसी भी सरकारी दफ्तर में चले जाइए, बाबूओं से लेकर बड़े अफसर तक तनाव के भाव लिए बार-बार अपने कम्प्यूटर की स्क्रिन पर झांकते नजर आएंगे। इसकी वजह है सरकार का ई-फाइलिंग सिस्टम, जिसे मुख्य सचिव ने अपनी प्राथमिकता पर ले रखा है। ई-फाइलिंग सिस्टम में किस ऑफिस में फाइल कब पहुंची और कितने वक्त किस सीट पर रही इसकी सारी जानकारी मुख्य सचिव से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय के पास रियल टाइम में जाती है।
राज्य सरकार ने फाइलों के फिजिकल मूवमेंट को खत्म करने और इसकी जगह आईटी का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए करीब एक वर्ष पूर्व ई-फाइलिंग सिस्टम लागू किया था। सचिवालय में यह पूरी तरह से लागू हो चुका है, वहीं अधीनस्थ कार्यालयों में भी इसे लागू किया जा चुका है। जिला स्तर पर भी कलेक्टरों को प्रस्ताव आदि ई-फाइल के माध्यम से ही भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
कैसे काम करता है ई-फाइलिंग सिस्टम
ई-फाइलिंग सिस्टम के तहत अधिकारी व कर्मचारी को सरकार की ओर से एसएसओ आईडी और पासवर्ड मिलते हैं। साथ ही उन्हें डिजिटल हस्ताक्षर के राइट्स भी मिलते हैं। सरकार में सभी फाइलों की स्कैनिंग कर उन्हें सिस्टम पर चढ़ाया जाता है फिर कम्प्यूटर के जरिए ऑनलाइन भेजा जाता है। इसमें फाइल का मूवमेंट बहुत तेज हो जाता है क्योंकि पहले जब फाइल एक जगह से दूसरी जगह फिजिकली भेजा जाता था तो इसमें कई दिनों का समय लगता था लेकिन यह काम अब मिनटों में बैठे-बैठे ही हो जाता है लेकिन यह सिर्फ आधा सच है, इस व्यवस्था में दर्जनों खामियां भी हैं।
इसी बात को लेकर पिछले दिनों सीनियर लेवल ऑफिसर्स मीटिंग में मुख्य सचिव सुधांश पंत को यह कहना पड़ा था कि ई-फाइलिंग सिस्टम की वजह से अफसर क्वांटिटी पर ही ध्यान दे रहे हैं और क्वालिटी इससे प्रभावित हो रही है।
टाइम मैनेजमेंट ही सबसे बड़ी समस्या
- समय की बचत के लिए इस सिस्टम को लागू किया गया था लेकिन टाइम मैनेजमेंट ही इस सिस्टम की सबसे बड़ी समस्या बन चुका है। दरअसल एक फाइल जब किसी कर्मचारी या अफसर के सिस्टम पर डिस्पोजल के लिए आती है तो जब तक उस फाइल का डिस्पोजल नहीं होता तब तक वह उसी कर्मचारी या अधिकारी के खाते में बोलती है। यहां तक कि कर्मचारी छुट्टी पर हो या ऑफिस खत्म होने के बाद घर चला गया हो तब भी फाइल डिस्पोजल के घंटे काउंट होते जाते हैं।
- यदि किसी फाइल का निस्तारण आचार संहिता या नीतिगत प्रकरण के कारण नहीं हो पा रहा है तो इसमें संबंधित कर्मचारी या अफसर की गलती नहीं होने के बाद भी फाइल डिस्पोजल में लगने वाला समय उसके खाते में जुड़ जाता है।
- कर्मचारियों ने बताया कि फाइल के निस्तारण के बाद जब उससे जुड़ी कोई नई डाक आती है तो उसे ओपन करने पर समय की गणना पूर्व की तारीख से ही होती है।
- राजपत्रित अवकाशों या कर्मचारी के अवकाश पर रहने का समय भी औसत निस्तारण समय में सम्मिलित किया जाकर गणना की जा रही है। इसके चलते छुट्टी के दिन भी कर्मचारियों को फाइलें निकालनी पड़ती हैं।
- कार्यालयों में कर्मचारी तो छह बजे सीट छोड़कर घर चले जाते हैं लेकिन अधिकारी सीटों पर जमे रहते हैं और फाइलें कर्मचारियों के इनबॉक्स में भेजते रहते हैं। कर्मचारी अगले दिन उस फाइल का निस्तारण करता है तो वह पूरा समय कर्मचारी के खाते में जुड़ जाता है।
- इसके अलावा राजकाज पोर्टल की क्षमता भी पर्याप्त नहीं है और लोड बढ़ने पर यह हैंग होता रहता है। अधीनस्थ कार्यालयों में तो 5-5 कर्मचारियों पर एक कम्प्यूटर है, ऐसे में वहां काम बहुत प्रभावित हो रहा है।
गोपनीयता भंग होने की आशंका
कागज की फाइल ऑफिस से बाहर ले जाना आसान नहीं है लेकिन अफसर व कर्मचारी ई-फाइल अपने घर पर या अन्य कहीं भी खोल सकते हैं। इससे पूरा सिस्टम कंप्रोमाइज होने की आशंका रहती है। यह सिर्फ कयास ही नहीं है हाल में इस तरह के कई मामले सामने भी आ चुके हैं। जब अफसर की ई-फाइलिंग आईडी का इस्तेमाल कर नीचे मातहतों ने कई बड़े प्रकरण निपटा दिए, बाद में हुई जांच में इसका खुलासा भी हुआ।
इनका कहना है
सिस्टम में खामी का पता लगने के बाद ही उसका निराकरण होता है। इसमें भी जैसे-जैसे कमियों का पता लग रहा है, उन्हें दूर किया जा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग (डीओआईटी) की ओर से सिस्टम को अपडेट करने का कार्य किया जाता है।
-अरुण प्रकाश शर्मा, संयुक्त शासन सचिव, प्रशासनिक सुधार विभाग
ई फाइल सिस्टम की कमियों को लेकर कर्मचारियों ने 1 मई को कार्मिक विभाग के सचिव को ज्ञापन दिया था। इसमें ई-फाइलिंग को लेकर 11 कमियां बताई गई थी्ं। इस पर सचिव ने निराकरण करने का आश्वासन भी दिया था लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
-सीताराम चौधरी, अध्यक्ष, राजस्थान सचिवालय कर्मचारी संघ