राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर चर्चा में आए नरेश मीणा ने जेल से रिहा होने के बाद अमर उजाला से खास बातचीत में कई अहम और रोचक बातें साझा की हैं। एसडीएम थप्पड़ कांड और समरावता हिंसा के मामले में 8 महीने से जेल में बंद रहे नरेश 14 जुलाई को टोंक जेल से बाहर आए। राजस्थान हाईकोर्ट ने 11 जुलाई को उन्हें समरावता हिंसा केस में जमानत दी थी, जबकि थप्पड़ कांड में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी थी।
गौरतलब है कि 13 नवंबर 2024 को टोंक के समरावता गांव में नरेश मीणा ने उस समय के एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था। इस घटना के बारे में अब नरेश बोले- जो हुआ वह तात्कालिक और दुर्भाग्यपूर्ण था। उस समय की परिस्थितियां ऐसी थीं कि आवेश में आकर ऐसा हो गया। मुझे इस पर बहुत अफसोस है। मुझे यह भी नहीं पता था कि एसडीएम कौन है और उनका पूरा नाम क्या है।
मीणा ने आरोप लगाया कि घटना के बाद कुछ लोगों ने जातिगत माहौल बनाने की कोशिश की और कुछ हद तक इसमें वे सफल भी हुए। उन्होंने कहा कि जाट समुदाय में मेरे खिलाफ रोष पैदा किया गया लेकिन जब हनुमान बेनीवाल ने बयान दिया कि नरेश ने तो एक मारा, मैं होता तो चार मारता तब माहौल में बड़ा बदलाव आया और लोगों का गुस्सा भी कम हुआ। उन्होंने खुलकर कहा कि बेनीवाल उनके लिए बड़े भाई जैसे हैं और उन्होंने हमेशा उनका साथ दिया। अगर वे मेरे चुनाव में हेलीकॉप्टर से आ जाते, जैसा उन्होंने वादा किया था, तो मुझे कोई नहीं हरा सकता था। अपने समर्थकों को याद करते हुए मीणा भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि जिसने भी मेरा तिनका बराबर साथ दिया है, उसका मुझ पर कर्ज है और मैं वह कर्ज जरूर चुकाऊंगा।
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राजनीतिक दृष्टिकोण से नरेश मीणा ने एक बड़े सामाजिक संदेश की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि राजस्थान की तीन प्रमुख जातियां गुर्जर, मीणा और जाट एक मंच पर आएं ताकि किसानों के हित में एक सशक्त आंदोलन खड़ा किया जा सके। मैंने अपने विश्वविद्यालय के समय में यह प्रयोग किया था और अगर अवसर मिला तो विधानसभा में भी यही करने का मन है।
अपने गांव समरावता को लेकर मीणा ने बड़ी योजना का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि मैं इस गांव का बेटा हूं और इसकी पीड़ा मेरी पीड़ा है। मेरा सपना है कि समरावता प्रदेश का सबसे समृद्ध और सुविधाजनक गांव बने। उन्होंने आगे कहा कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगेंगे और गांव की समस्याओं को उनके सामने रखेंगे।