एक दिवसीय दौरे पर जयपुर आए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने एमएनआईटी में विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि इस समय हम देश में पांचवें नंबर की आर्थिक ताकत है, जल्द ही दुनिया की सबसे आगे होंगे।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को कहा कि आज हमारा देश दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। 2047 में हम दुनिया में सबसे आगे होंगे। सभी देश भारत की ओर देख रहे हैं। हम एकलव्य हैं। किसी के सिखाने का इंतजार नहीं करते। खुद ही सीख जाते हैं। भारत के लोगों का सामर्थ्य है कि 24 घंटे लगातार मेहनत कर सकते हैं।
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धनखड़ शुक्रवार को एक दिवसीय दौरे पर जयपुर आए। उन्होंने मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT) में नीति सभागार में विद्यार्थियों को संबोधित किया। विषय था नई शिक्षा नीति 2020 पर चर्चा। उन्होंने विद्यार्थियों को नसीहत दे दी कि आप तनाव को हमेशा दूर रखें। अपने विचारों को लागू करें और सिर्फ खुद से ही प्रतिस्पर्धा करें। आप यह कर लेंगे तो जीवन में सफलता अवश्य मिलेगी। मेहनत का कोई तोड़ नहीं है। विद्यार्थियों को व्यसनों और नशे से दूर रहना होगा, तभी भारत तरक्की करेगा। इस दौरान MNIT के डायरेक्टर एनपी पाढ़ी ने संस्थान की ओर से की गई पहलों की जानकारी दी। राजस्थान सेंट्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति आनंद भालेराव भी समारोह में मौजूद रहे।
मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण
समारोह से पहले उपराष्ट्रपति ने महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। जयपुर के MNIT परिसर में पौधरोपण भी किया। खेल और उद्यमिता के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मुखातिब हुए। शिक्षा मंत्रालय के फ्लैगशिप कार्यक्रमों की तस्वीरों की प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमेरिका में स्वागत हुआ और उनके भाषण को सराहा गया, वह आज के भारत के उज्जवल भविष्य को दर्शाता है। आप बहुत भाग्यशाली हैं कि आप ऐसे समय के साक्षी है जब भारत उदय हो रहा है। ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया। यह अब रुकने वाला नहीं है। इसे आपको पंख लगाने हैं। आपकी मेहनत इसे और आगे लेकर जाएगी। उन्होंने कहा कि साल 2020 में हमारा डिजिटल ट्रांसफर न के बराबर था। अमेरिका, फ्रांस और विकसित देशों के मुकाबले हम बहुत पीछे थे। 2022 मैं हमारा डिजिटल ट्रांसफर 1.3 ट्रिलियन डॉलर का रहा। इससे फर्क़ नहीं पड़ता कि अंक कितने हैं, लेकिन आज हम अमेरिका के डिजिटल ट्रांसफर से आगे हैं।