वित्त विभाग के अफसरों की कारस्तानी का खामियाजा अब प्रदेश को उठाना पड़ेगा। केंद्र सरकार ने तय किया है कि केंद्र की सहायता से चलने वाली 27 बड़ी योजनाएं अब SNA मॉडल पर काम करेंगी। यानी इसका पैसा सीधे विभागों को ट्रांसफर होगा, वह भी तब जब राज्य सरकार इसमें अपने हिस्से की राशि पहले जमा करवाएगी।
पूर्व में यह राशि राज्य सरकार के कंसोलिडेटेड फंड में जमा हो रही थी, जिसका वित्त विभाग के अफसर मनमाना उपयोग कर रहे थे। पिछले वित्त वर्ष में केंद्रीय योजनाओं से मिले 9,500 हजार करोड़ रुपये और पांच हजार करोड़ के मैचिंग शेयर का बड़ा हिस्सा समय पर विभागों को समय रहते ट्रांसफर ही नहीं किया गया, जिसके चलते अधिकांश योजनाएं ठप पड़ गईं।
इस मामले में केंद्र सरकार से कई चिट्ठियां भी राज्य सरकार को भेजी गईं, जिसमें साफ चेतावनी दी गई थी कि केंद्रियांश तथा राज्यांश की राशि निर्धारित अवधि में जमा नहीं करवाए जाने पर 7 प्रतिशत पेनल्टी का प्रावधान है। ज्यादातर केंद्रीय सहायता प्राप्त योजनाएं 50-50 और 60-40 के अनुपात पर चलती हैं। यानी 50 से 60 प्रतिशत तक अंशदान राज्य सरकार को मैचिंग शेयर के रूप में मिलाना होता है। वित्त विभाग ने न सिर्फ केंद्रियांश विभागों को नहीं दिया, बल्कि राज्य मैचिंग शेयर भी जमा करवाने में देरी की।
इन योजनाओं को लिया SNA मॉडल में
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत आने वाली 11 योजनाएं
इनमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना,नेशनल मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन एंड टेक्नीकल, नेशनल मिशन ऑन सस्टेनेबल एग्रीक्लचर, परंपरागत कृषि विकास योजना, नेशन प्रोजेक्ट ऑफ एग्रो फोरेस्ट्री, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना।
डवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत आने वाली योजनाएं
नेशनल लाइव स्टॉक मिशन, ट्रेनिंग अंडर एलएलएम स्कीम, लाइव स्टॉक पोल्ट्री इंश्योरेंस, लाइव स्टॉक प्रोडक्शन सेंपल सर्वे स्कीम, लाइव स्टॉक सेंसस
इनके अलावा माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज स्कीम, अमृत मिशन, नेशनल लाइवलीहुड मिशन, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, मिशन शक्ति को भी SNA में शामिल किया गया है।