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Rajasthan: भू-जल प्राधिकरण विधेयक पारित नहीं करवा पाई भजनलाल सरकार, बिल फिर से प्रवर समिति को भेजा

Wed, 19 Mar 2025 06:53 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

Ground Water Authority Bill: राजस्थान विधानसभा में बुधवार को सरकार को फिर से किरकिरी का सामना करना पड़ा। जिस भू-जल प्राधिकरण विधेयक को पारित करवाने के लिए सरकार ने प्रवर समिति से आज फिर से सदन में बहस के लिए रखवाया था, उसे विधायकों के विरोध के बाद फिर से प्रवर समिति को भेजना पड़ गया। सरकार के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है।
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राजस्थान विधानसभा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान विधानसभा में बुधवार को भजनलाल सरकार ने भू-जल प्राधिकरण विधेयक को पारित करवाने के लिए चर्चा रखवाई। लेकिन विधायकों के विरोध के चलते सरकार को फिर से बैकफुट पर आना पड़ गया। सरकार ने अब इसे प्रवर समिति को भेज दिया है।

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गौरतलब है कि यह बिल इससे पहले भी मौजूदा सत्र में सरकार ने सदन में बहस के लिए पेश किया था। लेकिन विधायकों के विरोध के चलते इसे प्रवर समिति को भेजना पड़ा था। प्रवर समिति से आज यह बिल फिर से सदन में बहस के लिए रखा गया। लेकिन विधायकों के जबरदस्त विरोध को देखते हुए सरकार ने इसे फिर से प्रवर समिति को ही भेज दिया।

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क्यों हो रहा बिल का विरोध
बिल में ऐसे प्रावधान किए गए हैं कि प्रदेश में ट्यूबवेल खुदवाने के लिए सरकार से मंजूरी नहीं ली तो उपभोक्ता को जेल और जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। इसमें बिना प्राधिकरण की अनुमति ट्यूबवेल खोदने पर छह महीने जेल और एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है।

सदन में जोरदार विरोध
पूर्व में सदन में जब यह बिल पेश किया गया तो विधायकों ने यह कहते हुए इसका विरोध किया था कि इसमें किसानों को भारी परेशानी होगी। वहीं, बुधवार को जब यह बिल फिर से चर्चा में आया तो कई विधायकों ने प्रदेश में ट्यूबवेल खुदवाने की सरकार की बजट घोषणाओं पर सवाल उठा दिए। कांग्रेस के सचेतक रफीक खान ने विधेयक पर बहस के दौरान कहा, बिल में भू-जल पर 50 हजार का जुर्माना और छह माह की सजा का प्रावधान है। अगर अपने क्षेत्र और गांव में जाओगे तो जनता जूते मारेगी।

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फतेहपुर से कांग्रेस विधायक हाकम अली खान ने कहा, डार्क जोन से पानी निकालने पर पाबंदी है, लेकिन प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पा रही है। यह बिल लागू होने पर भी कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। उन्होंने कहा कि बिल के प्रावधानों के अनुसार, ट्यूबवेल खोदने के लिए फाइल प्राधिकरण के पास जाएगी और अनुमति मिलने तक लोग कैसे पानी का इंतजाम करेंगे। कई लोग आज भी पानी के लिए कुएं और ट्यूबवैल खुदवाते हैं, वो कैसे खुदवा पाएंगे। पीएचईडी को भी प्राधिकरण से अनुमति लेनी पड़ेगी। पानी पर भी आप पहरा बिठा रहे हो, यह जनता के साथ कुठाराघात है। 

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बीजेपी विधायकों ने भी किया विरोध
बिल के प्रावधानों को लेकर बीजेपी विधायक भी विरोध में रहे। नाथद्वारा से भाजपा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ ने कहा, जल संरक्षण की संरचनाओं को सहेजना जरूरी है। अस्पष्ट विधेयक भ्रष्टाचार का कारण बन जाता है। यह किन भूजल स्रोत पर लागू होगा। इसके हितकारियों को लेकर भी प्रावधान स्पष्ट नहीं है। पानी पर टैरिफ की भी बात इस विधेयक में रखी गई है। उन्होंने कहा, यह महत्वपूर्ण विधेयक है, जिसे सुधार करके लागू किया जाना चाहिए। 

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