फोटोग्राफर और फिल्ममेकर पद्मजा की पुस्तक ‘मैं कोई और’का रविवार को जवाहर कला केंद्र के कृष्णायन में लोकार्पण हुआ। यह पुस्तक उन्होंने डायरी फार्मेट में लिखी है, जिसमें उनके जीवन का वास्तविक घटनाक्रम दिया गया है। यह पुस्तक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सात वर्ष पहले पद्मजा के ब्रेन के पांच ऑपरेशन हुए थे और वे चलना, बोलना, खाना, पढ़ना भूल गई थीं। जवाहर कला केंद्र में हुए इस कार्यक्रम में डॉ. सुशील सी. तापड़िया मुख्य अतिथि थे। कार्यक्रम का संचालन हिमांशु पंड्या ने किया।
पद्मजा लंबे समय से बच्चों के लिए थियेटर, लिखना और ब्लाइंड बच्चों के लिए फोटोग्राफी करती रही हैं। यह पुस्तक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सात वर्ष पहले पद्मजा के ब्रेन के पांच ऑपरेशन हुए थे और वे चलना, बोलना, खाना, पढ़ना, लिखना भूल गई थीं। इसके बाद पद्मजा ने 24 वर्ष की आयु में फिर से किसी बच्चे की तरह अपने जीवन की शुरुआत की। उन्होंने सब कुछ दोबारा से सीखा।
पद्मजा अभी मुंबई में रहती हैं और फोटोग्राफी और फिल्म्स बनाती हैं। कार्यक्रम में डॉ. तापड़िया ने पद्मजा के ऑपरेशन से जुड़े अनुभव व दर्शकों के मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों के प्रश्नों के जवाब दिए। देवयानी भारद्वाज, द्रोण, आयुषी, मूमल, अजंता देव, हर्षल के साथ-साथ पद्मजा के पिता कमल शर्मा तथा मां अनुपमा तिवाड़ी ने भी पद्मजा के जीवन से जुड़े अनुभव साझा किए। पद्मजा ने बताया कि सर्जरी के बाद मैं सब कुछ भूल चुकी थीं। यहां तक कि खाना कैसे खाया जाता है यह भी याद नहीं था। जब मैंने डॉक्टर से पूछा कि यह सब क्यूं हो रहा है तो उन्होंने बताया कि मेरे दिमाग के दांये हिस्से के डैमेज होने की वजह से हुआ है। उन्होंने बताया कि मेरे पिता ने मुझे ये सिखाने के लिए एक साल की छुट्टी ली। मेरे फ्रेंड्स मेरे पास आते थे और मुझे ए-बी-सी से लेकर सब कुछ सिखाते थे।