भारतीय आदिवासी पार्टी के सलूंबर से प्रत्याशी जितेश कटारा ने अमर उजाला के साथ खास बातचीत करते हुए कई विषयों पर अपनी बात रखी। जितेश कटरा ने कहा कि स्वर्गीय विधायक अमृतलाल मीणा ने खुद विधायक होते हुए अपनी पत्नी को सरपंच बना दिया। घर का ही विकास किया, क्या यही महिला सशक्तिकरण है।
जितेश ने कहा कि क्या महिलाओं के साथ इस आदिवासी क्षेत्र में जो हादसे, दुर्घटनाएं और दुष्कर्म होता है, वह नजर नहीं आया। इस आदिवासी इलाके में सड़कें नहीं है, महिलाओं को डिलीवरी के वक्त झोली में डालकर अस्पताल तक लेकर भागना पड़ता है, जिसमें उनकी जान तक चली जाती है क्या यह नजर नहीं आया। इस आदिवासी क्षेत्र में अस्पताल नहीं है, स्कूल नहीं है, इलाज के लिए उदयपुर तक ले जाना पड़ता है, खून की कमी से लोगों की जान तक चली जाती है, क्या यही विकास है?
जितेश कटारा ने बातचीत में आगे कहा कि जो बीजेपी सिंपैथी लहर की बात कर रही है, वह लहर नहीं है। असल बात ये है कि बीजेपी का राज यहां खत्म होने वाला है। उसका सूचक है, क्योंकि बीजेपी ने जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं की टिकट काटकर एक अनपढ़ महिला टिकट दिया है, जो रोड का र नहीं लिख पाती हैं, जो सड़क का स नहीं लिख पाती है। जब वह पढ़ लिख नहीं पाती हैं तो वह विकास कैसे करा पाएंगी।
जितेश कटरा ने कि असल बात यह है कि यहां पर दो ऐसे लोग हैं, जो इनके अनपढ़ होने का फायदा उठाना चाहते हैं। इनको जीतकर विधानसभा भेजकर उनके लेटर पैड इनकी सेल का दुरुपयोग करना चाहते हैं और सिर्फ खुद का विकास करना चाहते हैं। इसलिए माहौल बनाया जा रहा है।
जितेश कटारा ने आगे कहा कि यह आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र जरूर है, पर यहां जो चुनाव लड़ा जा रहा है, वह सर्व समाज को साथ लेकर लड़ा जा रहा है। यहां चुनाव विकास के लिए लड़ा जा रहा है। यहां चुनाव बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर लड़ा जा रहा है। यहां पानी को लेकर लड़ा जा रहा है। यहां की सामाजिक समरसता बिगड़ने का जो प्रयास किया जा रहा है, उसको सुचारु करने के लिए यहां चुनाव लड़ा जा रहा है।
हमारे युवाओं को बदनाम किया जा रहा
सलूंबर विधानसभा उपचुनाव को लेकर जितेश कटारा ने कहा कि यहां पर जितेश कटरा चुनाव नहीं लड़ रहा है, यहां पर आम जनता चुनाव लड़ रही है। हमारे यहां की कुछ अलग मांगे हैं, हमारे यहां के युवा को कोई सुनने वाला नहीं है। हमारे युवाओं पर मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं, उनकी बात नहीं सुनी जाती, उन्हें कलंकित किया जाता है। उनसे उनके जीवनी को बनाने वाली नौकरी का मौका छीन लिया जाता है। कौन सुनेगा उनकी इसलिए यह चुनाव लड़ा जा रहा है।
जितेश कटारा ने आगे कहा कि यहां सलूंबर में आकर जो भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ राजनीति कर रहे हैं, इसकी आवश्यकता नहीं है। यहां पर धर्म नहीं नौकरी चाहिए। यहां पर धर्म नहीं पीने का पानी चाहिए। यहां पर धर्म नहीं शिक्षा का मौका चाहिए। यहां पर धर्म नहीं इलाज के लिए अस्पताल चाहिए।
सीएम को भी घेरा
जितेश कटारा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लेकर कहा कि भाजपा ने तीसरी पंक्ति में बैठे हुए एक नेता को मुख्यमंत्री बना दिया जो जीवन में कभी विधायक नहीं रहा, संसद नहीं रहा वह आज मुख्यमंत्री बन गया। किसकी कृपा से किसके मंत्रों से, किसके मंत्र पढ़े जो वह आज शेर बन गया है। राजस्थान सरकार के 12 महीना के काम पर कटारा ने कहा सलूंबर के लिए क्या किया, क्या यहां शिक्षा के साधन उपलब्ध हुए? क्या यहां अस्पताल उपलब्ध हुए? सिर्फ चुनावी जुमले हैं।