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Jaipur News : व्याख्यान देने अमेरिका पहुंचे प्रो. विनोद शास्त्री, बोले- ग्रह-नक्षत्रों से हमारा सीधा संबंध

Sat, 07 Sep 2024 04:49 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

सिर्फ भारत ही नहीं विदेशी धरती पर अब धर्म और ज्योतिष लेकर लोगों की रुचि बढ़ती जा रही है। अमेरिका के वाशिंगटन में शनिवार को ‘धर्म- ज्योतिष एवं वास्तु’ पर एक व्याख्यान आयोजित करवाया गया। राजस्थान संस्कृत यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर प्रो. विनोद शास्त्री ने इस कार्यक्रम में वास्तु और ज्योतिष को लेकर व्याख्यान दिया।
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राजस्थान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. विनोद शास्त्री ने शनिवार को अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में ‘धर्म- ज्योतिष एवं वास्तु’ पर व्याख्यान दिया। इस व्याख्यान को सुनने के लिए अमेरिका में भारतीय मूल के नासा वैज्ञानिक, इंजीनियर, डॉक्टर और वकील भी पहुंचे। 
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इस मौके पर प्रो. शास्त्री ने कहा कि ग्रह-नक्षत्र का मनुष्य शरीर से सीधा संबंध है। पृथ्वी पर जीव मात्र की उत्पत्ति सूर्य की स्पर्म रूपी किरणों से पृथ्वी पर व्याप्त पानी में सबसे पहले हुई थी। पृथ्वी और चंद्रमा युगल रूप में पैदा हुए थे, इसीलिए पृथ्वी का भाई होने के कारण चंद्रमा हमारा मामा होता है और मनुष्य से सीधा संबंध रखता है। सूर्य हमारी उत्पत्ति का कारण होने से हमारा पिता है और पृथ्वी माता है। इसी तरह अन्य ग्रहों और नक्षत्रों से भी मनुष्य शरीर का सीधा संबंध है, इसलिए ज्योतिष शास्त्र मानव जीवन में उत्साह जगाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। 

कुंडली मिलान आज अधिक महत्वपूर्ण

वैवाहिक गुण मिलान के वैज्ञानिक स्वरूप को स्पष्ट करते हुए प्रो. शास्त्री ने कहा कि आज के परिप्रेक्ष्य में गुण मिलान का औचित्य कम रह गया है लेकिन कुंडली मिलान अधिक महत्वपूर्ण है। साथ ही बड़ी उम्र में विवाह संतान एवं दाम्पत्य की दृष्टि से ठीक नहीं है। प्रो. शास्त्री ने मांगलिक दोष की भ्रांतियों का निराकरण ज्योतिषीय उपायों से संभव होना बताया। अनावश्यक मांगलिक दोष, नाडी दोष आदि के कारण आमजन को घबराना नहीं चाहिए।
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वास्तु शास्त्र की विवेचना करते हुए शास्त्री ने बताया कि अलग-अलग देश का वास्तु अलग होता है। एक वास्तु के सिद्धांत सभी जगह लागू नहीं हो सकते। प्रो. शास्त्री ने व्यावसायिक प्रतिष्ठान, मंदिर या बहुमंजिला भवन के लिए विभिन्न प्रकार के वास्तु और उनके व्यावहारिक प्रयोगों को उदाहरण सहित समझाया। प्रश्नोत्तर काल के दौरान प्रो. शास्त्री ने श्रोताओं के मांगलिक दोष, नाड़ी दोष , वास्तुशास्त्र संबंधी अनेक प्रश्नों का शास्त्रीय उदाहरणों के साथ निराकरण किया। 

व्याख्यान समारोह में अमेरिकी सरकार की विदेश सेवा के अनीश शाह, भारत के पूर्व राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा के परिवारजन रेणु शर्मा एवं रवि शर्मा उपस्थित रहे। अमेरिका में भारतीय मूल के नासा वैज्ञानिक, इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, व्यापारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
समारोह के अंत में  हिंदू टेंपल मेट्रोपॉलिटन वाशिंगटन की वाइस प्रेसिडेंट विजय कुशवाहा एवं हैड प्रिष्ट पं पीताम्बर दत्त शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। समारोह का संयोजन एवं संचालन अमेरिकी सरकार में सलाहकार सुविना गुप्ता एवं आशीष गुप्ता ने किया।
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