फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jaipur News: ‘गीगला का बापू’, जो भारत पाक युद्ध के दौरान भर देता था जोश; जानें 54 साल पुरानी रोचक बात

Sat, 10 May 2025 08:20 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

Jaipur News: वरिष्ठ रंगकर्मी ईश्वर दत्त माथुर के मुताबिक युद्ध के दिनों में गीगला का बापू के अलावा राष्ट्रीय और प्रादेशिक समाचार सुनाने के लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने सूचना केंद्र, छोटी-बड़ी चौपड़, अजमेरी गेट, चांदपोल बाजार आदि पर लाउड स्पीकर लगा रखे थे। पढ़ें पूरी खबर...।
विज्ञापन
गीगला का बापू - फोटो : AI Image- Freepik
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत और पाकिस्तान के मध्य सन् 1965 और 1971 में हुए युद्ध के दौरान आकाशवाणी के 'गीगला का बापू' धारावाहिक ने सेना और आम जनता के हौसले बुलंद किए थे। राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र सिंह शेखावत ने इस बारे में विस्तार से बताया। प्रसिद्ध लोक कलाकार दिवंगत गणपत लाल डांगी के इस धारावाहिक को सुनने का रोज शाम सबको इंतजार रहता था। तब आज की तरह टीवी और सोशल मीडिया नहीं थे। गांव हो या शहर सब लोग आकाशवाणी और अखबारों की सूचना पर ही निर्भर थे।

विज्ञापन


यह भी पढ़ें- India-Pak Tension: हनुमानगढ़ में अनिवार्य ब्लैकआउट लागू, हर रात 7 बजे से सुबह तक बंद रहेंगे सभी लाइट स्रोत
 
पत्रकार जितेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि युद्ध के दौरान सेना लोगों में राष्ट्र भक्ति की भावना को जागृत करने के लिए आकाशवाणी निदेशक गोपाल दास ने लोक कलाकार गणपत लाल डांगी और रंजना चौधरी से ‘लड़े शूरमा आज जी’ के नाम से गीगला का बापू धारावाहिक शुरू करवाया था।
विज्ञापन


आकाशवाणी में रहे साहित्यकार इकराम राजस्थानी के मुताबिक भारत-पाक युद्ध के समय में आकाशवाणी का यह धारावाहिक आम जनता का अतिप्रिय कार्यक्रम था। लोक कलाकार गणपत लाल डांगी और रंजना चौधरी को सुनने को श्रोता बेताब रहते। डांगी के इस कार्यक्रम ने पूरे जन मानस और सेना में राष्ट्र भक्ति के प्रति जोश को जगा दिया था।
 

विज्ञापन

गीगला का बापू - फोटो : AI Image- Freepik
धारावाहिक में गीगला का बापू के रूप में गणपत लाल डांगी ने भोपा का  और रंजना चौधरी ने मां का किरदार निभाया था। कार्यक्रम की शुरुआत ‘चामुंडा जगदम्बा शिला, करणी माता धंयावां जी। सिंह भवानी किरपा करज्यो, गीत जीत का गांवा जी...’ से होती थी।
 
कार्यक्रम के आरम्भ में इस गीत को समवेत स्वर में सुनाने के बाद युद्ध की बातों को कलाकार बहुत ही अच्छे ढंग से प्रस्तुत करते थे। राष्ट्रीयता  के संवाद सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो जाते थे। कार्यक्रम के मुख्य  किरदार डांगी दिन भर की घटनाओं का लेखा जोखा अपनी वाणी से सुना कर आम जनता में जोश भर देते थे।

यह भी पढ़ें- Udaipur News: उदयपुर में 10 हजार का इनामी हार्डकोर अपराधी गिरफ्तार, महिला के वेश धरकर घूम रहा था
 
वरिष्ठ रंगकर्मी ईश्वर दत्त माथुर के मुताबिक युद्ध के दिनों में गीगला का बापू के अलावा राष्ट्रीय और प्रादेशिक समाचार सुनाने के लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने सूचना केंद्र, छोटी-बड़ी चौपड़, अजमेरी गेट, चांदपोल बाजार आदि पर लाउड स्पीकर लगा रखे थे। शाम को युद्ध का समाचार सुनने के बाद गीगला का बापू को सुनने के लिए लाउड स्पीकर के नीचे लोगों की भीड़ जमा हो जाती थी। रोज शाम को यह धारावाहिक सुनने की उत्सुकता बनी रहती। इस कार्यक्रम ने जनता और सेना के हौसले को बुलंद करने का बड़ा काम किया था। गुलाब सिंह मीठड़ी के अनुसार गीगला का बापू के बोले गए संवाद लोगों की जबान पर चढ़ गए थे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें