धारावाहिक में गीगला का बापू के रूप में गणपत लाल डांगी ने भोपा का और रंजना चौधरी ने मां का किरदार निभाया था। कार्यक्रम की शुरुआत ‘चामुंडा जगदम्बा शिला, करणी माता धंयावां जी। सिंह भवानी किरपा करज्यो, गीत जीत का गांवा जी...’ से होती थी।
कार्यक्रम के आरम्भ में इस गीत को समवेत स्वर में सुनाने के बाद युद्ध की बातों को कलाकार बहुत ही अच्छे ढंग से प्रस्तुत करते थे। राष्ट्रीयता के संवाद सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो जाते थे। कार्यक्रम के मुख्य किरदार डांगी दिन भर की घटनाओं का लेखा जोखा अपनी वाणी से सुना कर आम जनता में जोश भर देते थे।
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वरिष्ठ रंगकर्मी ईश्वर दत्त माथुर के मुताबिक युद्ध के दिनों में गीगला का बापू के अलावा राष्ट्रीय और प्रादेशिक समाचार सुनाने के लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने सूचना केंद्र, छोटी-बड़ी चौपड़, अजमेरी गेट, चांदपोल बाजार आदि पर लाउड स्पीकर लगा रखे थे। शाम को युद्ध का समाचार सुनने के बाद गीगला का बापू को सुनने के लिए लाउड स्पीकर के नीचे लोगों की भीड़ जमा हो जाती थी। रोज शाम को यह धारावाहिक सुनने की उत्सुकता बनी रहती। इस कार्यक्रम ने जनता और सेना के हौसले को बुलंद करने का बड़ा काम किया था। गुलाब सिंह मीठड़ी के अनुसार गीगला का बापू के बोले गए संवाद लोगों की जबान पर चढ़ गए थे।