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Jaipur News: RSS की शताब्दी पर विशेष आयोजन, प्रांत प्रचारक ने की पंच परिवर्तन और राष्ट्र चेतना पर विशेष चर्चा

Thu, 02 Oct 2025 04:37 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

आरएसएस के 100वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में प्रांत प्रचारक बाबूलाल ने राष्ट्र निर्माण में संघ की भूमिका पर चर्चा की। इस मौके पर वर्तमान चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने पंच परिवर्तन के बारे में बात की।
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विजयादशमी पर संघ की शताब्दी यात्रा का स्मरण, समाज समरसता और राष्ट्रीय चेतना पर बल
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विस्तार
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शहर के दुर्गापुर बस्ती, गोपाल नगर, मालवीय बाग में विजयादशमी उत्सव सादगी और उत्साह से आयोजित हुआ। यह आयोजन संघ की ऐतिहासिक यात्रा और राष्ट्र निर्माण में उसके योगदान का स्मरण भी बना।
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कार्यक्रम की मुख्य अतिथि, पूर्व जिला टीचर ट्रेनिंग कमेटी अध्यक्ष एवं रोटरी क्लब की सक्रिय सदस्य आशा मिश्रा रहीं। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि 1925 में डॉ. हेडगेवार ने विजयादशमी के दिन संघ की नींव रखी थी। उन्होंने अनुशासन और संगठन की आवश्यकता को समय रहते समझ लिया था। मातृशक्ति की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा, सेना, खेल या कार्यस्थल, हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी क्षमता सिद्ध की है।

विशिष्ट अतिथि व जयपुर प्रान्त प्रचारक बाबूलाल ने अपने विस्तृत संबोधन में डॉ. हेडगेवार के जीवन प्रसंगों को स्मरण कराया। उन्होंने बताया कि 11 वर्ष की आयु में माता-पिता को खोने के बावजूद हेडगेवार ने अंग्रेजी शासन के अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का मार्ग चुना। 16 वर्ष की आयु में आंदोलन का नेतृत्व, 1925 में संघ की स्थापना, 1930 में भगवा ध्वज फहराकर राष्ट्रीय चेतना जगाना और स्वतंत्रता संग्राम व प्रतिबंधों के दौर में धैर्यपूर्वक संघ का संचालन उनकी राष्ट्रभक्ति का परिचायक रहा।
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उन्होंने 1955 के गोवा मुक्ति आंदोलन, 1962 के चीन युद्ध और 1963 की गणतंत्र दिवस परेड में संघ की भूमिका को विशेष रूप से उल्लेखित किया। बाबूलालजी ने कहा कि संघ ने सदैव सामाजिक समरसता, जाति-भेद उन्मूलन और राष्ट्रीय एकता को सर्वोपरि माना। राम मंदिर निर्माण का संकल्प और उसका साकार होना संघ की ऐतिहासिक उपलब्धि है।

वर्तमान चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने पंच परिवर्तन की अवधारणा प्रस्तुत की। परिवार व्यवस्था की रक्षा, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी का पुनर्जागरण और आत्मबोध व राष्ट्रीय चेतना। उन्होंने कहा कि भारत आज विश्व में अग्रणी है, परंतु आंतरिक चुनौतियों से सावधानी आवश्यक है। संघ का हर स्वयंसेवक इन्हें अवसर में बदलने के लिए संकल्पित है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक, मातृशक्ति और समाज के गणमान्यजन उपस्थित रहे।
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विजयादशमी पर संघ की शताब्दी यात्रा का स्मरण, समाज समरसता और राष्ट्रीय चेतना पर बल

 

विजयादशमी पर संघ की शताब्दी यात्रा का स्मरण, समाज समरसता और राष्ट्रीय चेतना पर बल

 

विजयादशमी पर संघ की शताब्दी यात्रा का स्मरण, समाज समरसता और राष्ट्रीय चेतना पर बल

 

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