ड्रग तस्करों के लिए राजस्थान अब डायवर्जन रूट की तरह इस्तेमाल हो रहा है। ANTF की कार्रवाइयों में यह खुलासा हुआ है कि पहले जहां पाकिस्तान बॉर्डर से ड्रग्स की तस्करी प्रमुख थी, वहीं अब कड़ी सुरक्षा के चलते तस्कर नए रास्ते तलाश रहे हैं।
राजस्थान में ड्रग तस्करी का नेटवर्क तेजी से अपना स्वरूप बदल रहा है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की छह महीने की कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अब पारंपरिक ‘गोल्डन क्रेसेंट’ (पाकिस्तान-अफगानिस्तान-ईरान) की जगह ‘गोल्डन ट्रायंगल’ (म्यांमार-लाओस-थाईलैंड) से आने वाली ड्रग्स का प्रभाव बढ़ रहा है।
ANTF ने गठन के महज 175 दिनों में 563 करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त कर 258 तस्करों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान 23 हजार किलो से ज्यादा सिंथेटिक टैबलेट्स, 18 हजार किलो गांजा और 10,550 किलो डोडा बरामद किया गया। यह आंकड़े बताते हैं कि पारंपरिक अफीम के साथ-साथ अब केमिकल और सिंथेटिक ड्रग्स का चलन तेजी से बढ़ रहा है।
ANTF के आईजी विकास कुमार के अनुसार, पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों से ड्रग सप्लाई में तेजी आई है। मणिपुर और नागालैंड जैसे राज्यों में अस्थिर हालात का फायदा उठाकर म्यांमार और आसपास के देशों से ड्रग्स भारत में पहुंच रही है, जो राजस्थान होते हुए अन्य राज्यों तक भेजी जा रही है।
राजस्थान बना ‘डायवर्जन रूट’
सिंथेटिक ड्रग्स का बढ़ता खतरा
देशभर से जुड़ रहा नेटवर्क
इस नेटवर्क की जड़ें अब एक राज्य तक सीमित नहीं हैं। मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, बिहार, झारखंड, ओडिशा और तेलंगाना से अलग-अलग तरह की ड्रग्स राजस्थान पहुंच रही हैं। डोडा पाउडर जहां पूर्वी राज्यों से आ रहा है, वहीं केमिकल ड्रग्स पश्चिमी राज्यों से सप्लाई हो रही है।
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वैश्विक बदलाव का असर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बदलाव दिख रहा है। अफगानिस्तान में तालिबान की कार्रवाई के बाद म्यांमार अब दुनिया में अफीम उत्पादन का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। यही वजह है कि ‘गोल्डन ट्रायंगल’ का प्रभाव बढ़ रहा है और इसका असर भारत के ड्रग नेटवर्क पर भी साफ दिख रहा है।
कुल मिलाकर, राजस्थान में ANTF की कार्रवाई ने न सिर्फ बड़ी बरामदगी की है, बल्कि यह भी उजागर किया है कि ड्रग तस्करी अब पुराने रास्तों से हटकर नए, ज्यादा जटिल और अंतरराज्यीय नेटवर्क के जरिए संचालित हो रही है।