राजस्थान में जल जीवन मिशन प्रोजेक्ट में कथित फर्जीवाड़े और घोटाले के आरोपों की जांच की मांग को लेकर बीजेपी के राज्यसभा सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने सचिवालय में पहले एडिशनल सीवीसी और उसके बाद एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर मंगलवार को अशोक नगर थाने पहुंचकर कंप्लेंट दी। शिकायतकर्ता टीएन शर्मा को साथ लेकर डॉ. किरोड़ीलाल मीणा पहुंचे। उन्होंने 20 हजार करोड़ और 900 करोड़ के कामों में घोटाले के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की।
सांसद किरोड़ीलाल मीणा के अशोक नगर थाने में पहुंचने के बाद जब एफआईआर दर्ज नहीं कि गई। तो विधानसभा में बीजेपी के नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ भी अशोक नगर थाने पहुंच गए। सांसद किरोड़ी लाल मीणा थाने के बाहर ही धरने पर बैठ गए। किरोड़ीलाल ने कहा कि केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन योजना में हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार के खिलाफ आज राजस्थान सचिवालय में पहुंचकर सीवीसी की एडिशनल सीवीसी सोविला माथुर को जलदाय मंत्री और आईएएस के खिलाफ शिकायत दी, उम्मीद है कार्रवाई होगी।
जल जीवन मिशन के टेंडरों में हुए फर्जीवाड़े को लेकर एक शिकायत अशोक नगर थानाधिकारी को भी दी है। उम्मीद है मुकदमा दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे, अन्यथा आंदोलन का सहारा लेना पड़ेगा। राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम-2012 के सेक्शन-17 का उल्लंघन किया है, सेक्शन-41 में लिखा है अगर इस क़ानून का उल्लंघन होता है तो छह महीने से लेकर पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। गहलोत सरकार ने इस एक्ट को बनाया और इस एक्ट की गहलोत सरकार ही धज्जियां उड़ाकर जल जीवन मिशन में टेंडरों में घपला कर करोड़ों रुपये को निगल रही है।
अशोक नगर थाने के बाहर धरने पर बैठे किरोड़ी लाल
सांसद डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि मुख्यमंत्री बार-बार कहते हैं, हमारे यहां हर FIR दर्ज होती है। मैं केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन में राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम-2012 के सेक्शन-17 के उल्लंघन का मामला दर्ज कराने अशोक नगर थाने आया था, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई, तो अब धरने पर बैठा हूं। सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने थाने पर धरना दे दिया, तो पुलिस अफसर उनसे बातचीत करने पहुंचे। मीडिया से रूबरू होकर डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि फेक और फैब्रिकेटेड डॉक्यूमेंट लेकर 900 करोड़ रुपये के काम ले लिए गए, जो डॉक्यूमेंट हमने मीडिया के सामने कल ही रखे थे। एक दूसरा मामला यह है कि राजस्थान के फाइनेंस डिपार्टमेंट ने डायरेक्शन दिए थे कि टेंडर्स में पारदर्शिता बनी रहे और RTPP एक्ट 2012 का उल्लंघन नहीं हो। इन आदेश के बाद भी पीएचडी डिपार्टमेंट ने इसका वॉयलेशन कर दिया। इससे 30 से 40 परसेंट तक ठेकेदारों की पूलिंग हो गई।
पुलिंग होने के कारण टेंडर 30 से 40 परसेंट तक हाई रेट पर चले गए। यह आरटीपीपी एक्ट का उल्लंघन है। जिसमें पांच साल तक की सजा का प्रावधान है। तो दूसरी एफआईआर 20 हजार करोड़ के मामले को लेकर दे रहे हैं। जो पुलिस दर्ज नहीं कर रही, जबकि पहली एफआईआर यह है कि दो फर्मों ने मिलकर 900 करोड़ का ठेका ले लिया और काम भी पूरा कर दिया। बार-बार राजस्थान सरकार को लिखा है कि उस पर कार्रवाई करो। उस शिकायत को लेकर कंप्लेनेन्ट टीएन शर्मा जी आए थे। मुझे पार्टी ने जिम्मेदारी दी थी कि आप इनके साथ जाएं। थाने ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। हम ढाई घंटे तक बैठे रहे। प्रतिपक्ष के नेता राजन राठौड़ आ गए तब भी मुकदमा दर्ज नहीं कर रहे हैं। प्रतिपक्ष के नेता ने मुझे कहा है कि आप शिकायतकर्ता को लेकर थाने के बाहर धरने पर बैठ जाओ हम इतनी आसानी से सरकार को 20 हज़ार करोड़ का घोटाला नहीं करने देंगे।
ये लिखा गया शिकायत में
जयपुर के प्रतापनगर सांगरिया निवासी शिकायतकर्ता एडवोकेट टीएन शर्मा की ओर से अशोक नगर थाने में दी गई शिकायत में ये लिखा गया है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर लेने के मामले में एफआईआर दर्ज की जाए। दो फर्मों को टेंडर दिए गए। इनमें श्री श्याम टयूबवेल कम्पनी शाहपुरा जयपुर और श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी शाहपूरा जयपुर को कार्यादेश दिए गए। इन टेन्डरस में कार्यादेश प्राप्त करने के लिए दोनों फर्मों ने भारत सरकार के उपक्रम इरकोन इंटरनेशनल लिमिटेड को पूरी तरह फर्जी वर्क कंप्लीशन सर्टिफिकेट पेश किए। दस्तावेजों की रूटीन जांच के तहत पीएचईडी के अधिकारी ने डाक्यूमेंट्स के वेरिफिकेशन के लिए इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड को एक मेल 21 मार्च को किया। जिसके जवाब में 22 मार्च को इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड ने पीएचईडी डिपार्टमेंट को मेल भेजकर बताया कि पेश किए गए सर्टिफिकेट पूरी तरह फर्जी हैं।
इसी तरह पीएचईडी डिपार्टमेंट ने एक और मेल पांच अप्रैल 2023 को भेजकर इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड को वेरिफिकेशन करने को कहा। इरकॉन इंडिया लिमिटेड ने दोबारा 6 अप्रैल को जवाब भेजकर डाक्यूमेंट्स फर्जी होने की जानकारी दी। साथ ही पीएचईडी डिपार्टमेंट को कहा कि इन डाक्यूमेंट्स के फर्जी होने पर वह कानूनी कार्रवाई करे, लेकिन उन फर्मों के संबंध एसीएस सुबोध अग्रवाल और जल जीवन मिशन के एमडी अविचल चतुर्वेदी से होने के कारण उन फर्मों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद 7 जून 2023 को एसीएस पीएचईडी सुबोध अग्रवाल को लिखा। जिनमें इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड में सुबोध अग्रवाल को इन फर्मों के खिलाफ जांच करने के लिए लिखा, लेकिन आज तक इन आईएएस अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेज पेश करने वाली फर्म के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इससे एसीएस, पीएचईडी सुबोध अग्रवाल और जल जीवन मिशन के एमडी अविचल चतुर्वेदी की इन दोनों फर्मों से मिलीभगत और इन फर्मों को राजनीतिक संरक्षण स्पष्ट है।
आरोप लगाए गए हैं कि दोनों फर्मों ने सुबोध अग्रवाल और अविचल चतुर्वेदी के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रच कर फर्जी दस्तावेजों सी टेंडर हासिल करने के लिए जालसाजी और धोखाधड़ी का अपराध किया है। जो आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत दंडनीय अपराध है। इसलिए निवेदन है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर उचित कार्रवाई करें।