राजस्थान में कांग्रेस के तीनों सहप्रभारियों अमृता धवन, वीरेंद्र सिंह राठौड़ और काज़ी मोहम्मद निजामुद्दीन को AICC की ओर से राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के 11-11 जिले अलॉट हुए हैं। रविवार रात सुखजिंदर सिंह रंधावा ने जिलों के आवंटन की लिस्ट जारी करते हुए तुरंत प्रभाव से सह प्रभारियों को इनका दायित्व सौंप दिया। कांग्रेस पार्टी संगठन के लिए अब संबंधित जिलों में जाकर ये सह प्रभारी काम शुरू करेंगे। राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए इसे संगठनात्मक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। कामकाज के एरिया का बंटवारा होने के बाद जल्द ही तीनों सह प्रभारी सचिव फील्ड में एक्टिव नजर आएंगे।
अमृता धवन को राजधानी जयपुर, पूर्वी राजस्थान के ज़िले अलॉट
जयपुर, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, दौसा, सवाई माधोपुर, सीकर, टोंक, बूंदी और कोटा ज़िलों की जिम्मेदारी सह प्रभारी अमृता धवन को दी गई है। राजस्थानी जयपुर और पूर्वी राजस्थान के कई जिले में शामिल हैं। हाड़ौती के 2 जिले भी अमृता धवन देखेंगी। पूर्वी राजस्थान में पिछले चुनाव में कांग्रेस ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया था। टोंक से पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट विधायक हैं। दौसा भी सचिन पायलट और उनके पिता स्व. राजेश पायलट का गढ़ रहा है।
वीरेंद्र सिंह राठौड़ को नहरी क्षेत्र, शेखावाटी और मारवाड़ के जिले
सह प्रभारी वीरेंद्र सिंह राठौड़ को नेहरू क्षेत्र और मारवाड़ के ज्यादातर जिले सौंपे गए हैं। पश्चिमी राजस्थान और थार का रेगिस्तानी इलाका उन्हें देखना होगा। राठौड़ को श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, झुंझंनूं, चूरू, नागौर, अजमेर, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर और पाली ज़िले में पार्टी की ज़िम्मेदारी दी गई है। जोधपुर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह क्षेत्र है। यहीं की सरदारपुरा सीट उनका विधानसभा क्षेत्र है। जबकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत जोधपुर से केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के खिलाफ पिछला लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। नागौर में कांग्रेस को बड़ी चुनौती सांसद हनुमान बेनीवाल और उनके भाई RLP विधायक नारायण बेनीवाल दे रहे हैं। चूरू में नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ का विधानसभा क्षेत्र है। झुंझुनू के उदयपुरवाटी में विधायक और मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा भी कांग्रेस सरकार और गहलोत के लिए चिंता खड़ी कर चुके हैं। हालांकि विधायक बृजेंद्र सिंह ओला भी झुंझुनूं की धरती से आते हैं, जो कद्दावर कांग्रेस नेता रहे स्वर्गीय शीशराम ओला के पुत्र हैं।
काजी मोहम्मद निजामुद्दीन को दक्षिणी राजस्थान का आदिवासी क्षेत्र और मेवाड़ मिला
सहप्रभारी काजी मोहम्मद निजामुद्दीन को बांसवाड़ा, डूंगरपुर, जालौर, प्रतापगढ़, सिरोही, बारां, भीलवाड़ा, चितौड़गढ़, झालावाड़, राजसमंद और उदयपुर का दायित्व सम्भलाया गया है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए ये ज़िले बहुत महत्व रखते हैं। दो बार की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया खुद झालावाड़ जिले के झालरापाटन से चुनाव लड़ कर आती हैं। वसुंधरा राजे के पुत्र सांसद दुष्यंत सिंह का भी झालावाड़-बारां लोकसभा क्षेत्र है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी चित्तौड़गढ़ से ही सांसद हैं। पूर्व नेता प्रतिपक्ष और मौजूदा असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया भी उदयपुर से आते हैं। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर सीपी जोशी राजसमंद से ही चुनकर आते हैं। आदिवासी बाहुल्य जिलों में बीटीपी यानी भारतीय ट्राइबल पार्टी का भी प्रभाव बढ़ता जा रहा है। गुजरात से सटे होने के कारण कई जिलों में चुनावी समीकरण कांग्रेस बीजेपी दोनों की समझ से बाहर हैं। उदयपुर में पिछले दिनों हुए 'सर तन से जुदा' नारे के साथ कन्हैयालाल टेलर हत्याकांड के बाद माहौल बदला हुआ है। ऐसे में सह प्रभारी काजी निजामुद्दीन के लिए यह क्षेत्र बड़ी चुनौती माना जा रहा है।