विश्व ह्दय दिवस के उपलक्ष्य में जयपुर में पाचंवीं सीएसआई कार्डियक प्रिवेंट 2023 का आयोजन किया गया। इसका आयोजन कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया राजस्थान चैप्टर ने किया था। इस सालाना कॉन्फ्रेंस में ह्दय रोगों के उपचार के साथ-साथ रोकथाम और बचाव के उपायों पर चर्चा की गई। इस कॉन्फ्रेंस के आयोजन अध्यक्ष डॉ. एसएम शर्मा और आयोजन सचिव डॉ. दीपक माहेश्वरी थे। इसके अलावा डॉ. दिनेश गौतम, डॉ. राजीव गुप्ता और डॉ. गौरव सिंघल ने भी इस आयोजन में महती भूमिका निभाई।
मेरठ से आए सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव अग्रवाल ने एलडीएल कोलेस्ट्रॉल टारगेट्स फॉर इंडिया एंड इम्पोर्ट्स ऑफ स्टेन्ट्स विषय पर बोला। उन्होंने बताया कि ह्दय रोग जीवनशैली से जुड़ा हुआ है। बच्चे स्कूल में फास्ट फूड खा रहे हैं। घर से टिफिन लेकर नहीं जाते। इससे बचपन में ही खानपान बिगड़ रहा है। 30-40 साल की उम्र में युवा शुगर, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं से घिर रहे हैं। कामकाजी लोगों के लिए फूड ऑर्डर करना सबसे आसान है। खाना बनाने की प्रक्रिया भी फुलटाइम शारीरिक गतिविधि ही तो है। वह कम हो गई है। प्रोसेस फूड भी समस्या को बढ़ा रहा है। इसमें केमिकल्स है। ऑइल घातक हो सकता है। शारीरिक गतिविधि कम होने से इतना ऑइल हम पचा नहीं पा रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि हम कोरोना को पूरी तरह समझ नहीं सके हैं। कोरोना के बाद अचानक मौत होने की समस्या बढ़ी है। सरकार ने भी ऐसा कोई प्रयास नहीं किया कि कोविड के बाद लोगों की अचानक मौतों के मामले में पोस्टमॉर्टम करवाया जाए या उनकी मेडिकल हिस्ट्री पता की जाए। समुदाय चाहता है कि हम इस पहेली को सुलझाएं, लेकिन बिना किसी जांच और स्क्रूटनी के ऐसा नहीं हो सकता। कोरोना के टीके के बाद सूजन बढ़ी है, यह कहना मुश्किल है। सरकार को अचानक होने वाली मौतों को लेकर नियम बनाना चाहिए। लक्षण, टीकाकरण, कोरोना की हिस्ट्री जैसे सवाल परिजनों से पूछे जाने चाहिए।
हार्ट अटैक से मौतें रोकने की स्ट्रैटजी पर चर्चा
एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. दीपक माहेश्वरी ने कहा कि इस कांफ्रेंस का मकसद ह्दय रोगों को होने से पहले रोकना है। आजकल अचानक दौरे पड़ रहे हैं और जवान लोगों की मौतें हो रही है। हमारे बहुत सारे डॉक्टर्स भी गए हैं। हम चाहते हैं कि कोई ऐसी स्ट्रैटजी निकले कि हम मौतों को कम से कम कर सकें।
यह है ह्दय रोगों की वजह
- जीवन शैली में परिवर्तन हो गया है। ऑनलाइन काम है।
- 24 घंटे की जवाबदेही है। काम के तयशुदा घंटे नहीं हैं। सीटिंग बढ़ गई है।
- महिलाओं के कामकाजी होने से किचन में समझौते हो रहे हैं।
- फास्ट फूड एक रियलटी बन गया है।
- बच्चों के लिए भी स्कूलों में खेलने के घंटे कम हो गए हैं।
- मोबाइल ने शारीरिक गतिविधियों को कम किया है।
(जैसा डॉ. राजीव अग्रवाल ने बताया)
साइंस को लाते हैं तो दुष्प्रभावों को नहीं छोड़ पाते
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि मैं पश्चिमी यूपी से हूं। चाय में इतनी चीनी डालते हैं कि चम्मच खड़ी हो जाए। उन लोगों को बीमारी नहीं होती थी, क्योंकि सारे दिन पैदल चलते थे। मेहनत होती थी। गांव जाने के लिए पांच किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। अब तो किसान भी कार से खेत पर खड़े होते हैं। किराए की लेबर काम करती है। हम साइंस को लाते हैं तो उसके दुष्प्रभावों को छोड़ नहीं पाते। हम इसे लाइफस्टाइल डिजीज कहते हैं।
कोलेस्ट्रॉल की समस्या भी अब बढ़ गई है
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि कोलेस्ट्रॉल की समस्या बढ़ गई है। जब कोलेस्ट्रॉल एक-दो दशक तक बनता रहता है, तो उस पर कैल्शियम जमने लगता है। यह निश्चित तौर पर ह्दय रोगों का एक बड़ा कारण है। नई दवाइयां आई हैं। अच्छी बात यह है कि भारत में प्रमुख ब्रांडेड दवाएं 50-60 रुपये में मिल जाती हैं। किसी और देश में इसके लिए 1000-1500 रुपये से कम नहीं लगते। डॉक्टरों और समुदाय के लिए यह बहुत बड़ा अवसर है। इन दवाइयों का उदारता से उपयोग करें, ताकि हमारा एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम रखा जा सके।