अमायरा सुसाइड मामले में बोले अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका
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मानसरोवर स्थित नीरजा मोदी स्कूल में नौ वर्षीय छात्रा अमायरा की मौत के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने राज्य सरकार, जयपुर पुलिस और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। संगठन के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब तक स्कूल की प्रधानाचार्य और जिम्मेदार प्रबंधन के खिलाफ कड़ी धाराओं में कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनकी कानूनी और सामाजिक लड़ाई जारी रहेगी।
गौरतलब है कि यह दर्दनाक घटना 1 नवंबर 2025 को हुई थी। नौ वर्षीय छात्रा अमायरा पढ़ाई के साथ नृत्य और संगीत में भी बेहतर प्रदर्शन करती थी। आरोप है कि कक्षा के कुछ सहपाठी उसे लगातार परेशान कर रहे थे। घटना वाले दिन बच्ची मानसिक रूप से परेशान थी और कथित तौर पर पांच बार अपनी कक्षा अध्यापिका से शिकायत करने गई। आरोप है कि उस समय अध्यापिका मोबाइल फोन में व्यस्त थीं, जबकि दूसरी कालावधि की शिक्षिका कक्षा में मौजूद नहीं थीं।
इसके बाद बच्ची कक्षा से बाहर चली गई। आरोप है कि किसी शिक्षक या सुरक्षाकर्मी ने उसे रोकने का प्रयास भी नहीं किया। कुछ देर बाद बच्ची ने स्कूल की चौथी मंजिल से छलांग लगा दी। हादसे के बाद स्कूल प्रशासन पर घटनास्थल को साफ करवाकर साक्ष्य मिटाने और सीसीटीवी फुटेज गायब करने के भी आरोप लगाए गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने जांच कराई थी। सुरक्षा मानकों में खामियां पाए जाने के बाद बोर्ड ने स्कूल की कक्षा 9वीं से 12वीं तक की मान्यता रद्द कर दी थी। हालांकि स्कूल प्रशासन ने हाईकोर्ट से इस आदेश पर स्थगनादेश प्राप्त कर लिया।
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इसके बाद 18 मार्च 2026 को राजस्थान शिक्षा विभाग ने भी सीबीएसई के आदेश की तर्ज पर सुरक्षा संबंधी कमियों का हवाला देते हुए एक आदेश जारी किया। हालांकि 2 अप्रैल 2026 को सरकारी वकीलों ने अदालत में बयान देकर विभाग के उस आदेश को वापस ले लिया।
सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने पुलिस जांच पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस की ओर से अदालत में दाखिल आरोप पत्र में भारतीय न्याय संहिता की उचित और सख्त धाराएं नहीं जोड़ी गईं। उनका दावा है कि इसके चलते मजिस्ट्रेट अदालत से आरोपियों को जमानत मिल गई। वर्तमान में मृतका के पिता विजय और माता शिवानी मामले में उचित धाराओं के तहत दोबारा जांच की मांग को लेकर सत्र न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। सीजेपी के सह-कार्यकर्ता अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका ने पीड़ित परिवार को हर स्तर पर न्याय दिलाने के लिए सहयोग जारी रखने की बात कही है।