जयपुर एयरपोर्ट पर सोमवार सुबह एप्रन क्षेत्र में NCC के माइक्रोलाइट विमान और एयरपोर्ट की ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसी इंडोथाई के एक वाहन के बीच टक्कर हो गई। हादसे के बाद एयरपोर्ट की ग्राउंड व्हीकल मैनेजमेंट व्यवस्था और एप्रन क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार घटना के समय विमान एप्रन क्षेत्र में मौजूद था, तभी ग्राउंड हैंडलिंग वाहन उससे टकरा गया।
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल एप्रन कंट्रोल सेंटर की निगरानी और समन्वय व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। एप्रन क्षेत्र में ग्राउंड वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने और विमानों की मूवमेंट के साथ समन्वय बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित नियंत्रण व्यवस्था की होती है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि NCC माइक्रोलाइट विमान की मूवमेंट और उसके निर्धारित रूट की जानकारी एप्रन कंट्रोल सेंटर को थी या नहीं। यदि जानकारी थी तो विमान और ग्राउंड वाहन के बीच टक्कर की स्थिति कैसे बनी?
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हादसे के बाद जयपुर एयरपोर्ट पर NCC के माइक्रोलाइट विमानों की ट्रेनिंग और संचालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जयपुर एयरपोर्ट प्रदेश के व्यस्त एयरपोर्ट्स में शामिल है और यहां नियमित रूप से बड़ी संख्या में विमानों की आवाजाही होती है। एयर ट्रैफिक बढ़ने के दौरान लैंडिंग और टेकऑफ की संख्या में भी इजाफा होता है।
ऐसे में व्यस्त एयरपोर्ट के एप्रन क्षेत्र में NCC माइक्रोलाइट विमानों की ट्रेनिंग और ग्राउंड वाहनों की नियमित आवाजाही के बीच पर्याप्त सुरक्षा और समन्वय व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल हादसे की वास्तविक वजह और इसमें किस स्तर पर चूक हुई, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।