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Holi 2022: फूलों से तो कहीं पत्थर मार खेलते हैं खूनी होली, यहां अलग-अलग अंदाज में मनाया जाता है रंगों का त्योहार

Thu, 17 Mar 2022 09:15 PM IST
रोमा रागिनी न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान में होली की अलग-अलग परंपरा है। जिसे लोग वर्षों से निभाते आ रहे हैं। कई जगह होली की परंपरा इतनी खतरनाक है कि लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाया जाता है।

 
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राजस्थान में होली की अलग-अलग परंपरा - फोटो : Amar Ujala Digital
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विस्तार
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फाल्गुन की बयार के साथ फिजा में रंग और अबीर गुलाल घुल चुका है। लोगों पर होली का रंग चढ़ चुका है। रंगों से होली खेला जाना आम बात है लेकिन राजस्थान में होली के त्योहार के कई रूप देखने को मिलते हैं। कहीं रंगों के साथ फूलों से होली खेली जाती हैं तो कहीं खूनी होली खेलकर परंपरा का निर्वहन किया जाता है। आइए जानते हैं कि राजस्थानी रंगों के अलावा कैसे होली के त्योहार को मनाते हैं। 

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अंगारों पर चलने की परंपरा - फोटो : Social Media
अंगारों पर चलने की परंपरा
सबसे पहले डूंगरपुर की होली की बात करते हैं। वागड़वासी पर होली का खुमार एक महीने तक रहता है। होली के तहत जिले के कोकापुर गांव में लोग होलिका के दहकते अंगारों पर नंगे पांव चलने की परंपरा निभाते हैं। मान्यता है कि अंगारों पर चलने से घर में विपदा नहीं आती।


 

पत्थरमार होली खेलते लोग - फोटो : Social Media
पत्थरमार होली
डूंगरपुर के ही भीलूडा में खूनी होली खेली जाती है। पिछले 200 साल से धुलंडी पर लोग खतरनाक पत्थरमार होली खेलते आ रहे हैं। डूंगरपुरवासी रंगों के स्थान पर पत्थर बरसा कर खून बहाने को शगुन मानते हैं। भारी संख्या में लोग स्थानीय रघुनाथ मंदिर परिसर में एकत्रित होते हैं। फिर दो टोलियों में बंटकर एक दूसरे पर पत्थर बरसाना शुरू कर देते हैं। इसमें कुछ लोगों के पास ढ़ाले भी होती हैं लेकिन हर साल कई लोग इस खेल में गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। 

 

लट्ठमार होली - फोटो : Amar Ujala Digital
लट्ठमार होली 
मथुरा से समीप होने के कारण भरतपुर और करौली के नंदगाव में लोग लठमार होली खेलते हैं। पुरुष महिलाओं पर रंग बरसाते हैं तो राधा रूपी महिलाएं उनपर लाठियों से वार करती हैं। 

 

गोविंद देव मंदिर में पुष्प होली खेलते भक्त - फोटो : Amar Ujala Digital
फूलों की होली
जयपुर के गोविंददेव मंदिर में होली का त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। यहां गुलाब और अन्य फूलों से होली खेली जाती है। इस दौरान राधा-कृष्ण के प्रेमलीला का मनोहर मंचन भी होता है। इस बार गोविंददेव मंदिर में 200 किलो फूलों से होली की शुरुआत हुई।


 

चंग-महरी होली - फोटो : Amar Ujala Digital
चंग और महरी नृत्य
राजस्थान के शेखावती में होली पर चंग और महरी नृत्य करने की परंपरा है। पुरुष चंग को एक हाथ से थामकर और दूसरे हाथ से थपकियां बजाकर सामूहिक नृत्य करते हैं। भाग लेने वाले कुछ कलाकार महिला का वेश धारण करते हैं, जिन्हें 'महरी' कहा जाता है। इन्हें देखने के लिए भारी भीड़ जुटती है।

कोड़ेमार होली खेलते लोग - फोटो : Social Media
 कोड़ामार होली
श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में कोड़ामार होली खेलने की परंपरा है। ढ़ोल की थाप पर लोगों की टोली रंग-गुलाल उड़ाते हुए निकलती। वहीं महिलाओं की टोली कपड़े को कोड़े की तरह लपेट कर रंग में भिगोकर पुरुषों को मारती है। 
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डोलची होली - फोटो : Social Media
गोटा गैर व डोलची होली
बीकानेर में डोलची होली खेलने की परंपरा है। दो गुटों में पानी डोलची में रखकर खेली जाती है। ये डोलची चमड़े की बनी होती है। जिसमें पानी भरकर लोग एक-दूसरे पर डालते हैं।

 
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