सचिन पायलट ने कहा- मेरे अध्यक्ष रहते हुए अशोक जी नए-नए मुख्यमंत्री बने थे। मैं नहीं चाहता था कि उनके मनोबल को ठेस पहुंचे, इसके लिए मैंने सेंट्रल इलेक्शन कमेटी (सीईसी) और ऊपर तक वैभव पैरवी की थी। मैंने सीईसी में भी कहा कि वैभव को टिकट मिलना चाहिए। टिकट मिला पर हम काफी मार्जिन से चुनाव हारे। मध्यप्रदेश में भी कमलनाथ जी के बेटे को टिकट दिया गया था, वे चुनाव जीते।'
बता दें कि इससे पहले 9 मार्च को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दावा किया था कि यूपीए के दूसरे टर्म में उन्होंने पार्टी से सचिन पायलट को केंद्रीय मंत्री बनाने की सिफारिश की थी। अगले दिन पायलट ने फोन कर मंत्री बनवाने में सहयोग का आग्रह भी किया था, तो मैंने उन्हें बताया कि मैं पहले ही हाईकमान को आपका नाम दे चुका हूं। उस समय यह बात मैंने किसी को नहीं बताई थी।