राजस्थान के अजमेर शहर में ख्वाजा मुइद्दिन चिश्ती की दरगाह। और चढ़ावा एक दो नहीं बल्कि 7.5 किलो चांदी।
चढ़ावा चढ़ाने वाले व्यक्ति ट्रांसजेंडर्स और अगर वजह पूछेंगे तो पता चलेगा कि किन्नरों को तीसरी श्रेणी में रखे जाने के फैसले से खुश होकर एक ट्रांसजेंडरों ने यह चढ़ावा चढ़ाया है।
देश के अलग-अलग हिस्सों से आए लोग यहां चढ़ावा चढ़ा रहे हैं।
ऐसे ही महाराष्ट्र से आए एक किन्नर का कहना है कि हम लोगों को पहले इंसानों के जैसे माना ही नहीं जाता था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के आने के बाद हम बहुत खुश हैं।
समूह के समूह में नाचते लोग यहां आ रहे हैं। उनका कहना है कि सूफीवाद में यह माना गया है कि दुनिया में सारे लोग एक समान हैं और इसीलिए हम यहां आए हैं।