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Rajasthan: विधानसभा में राज्यपाल मिश्र बोले- विधायक मर्यादा कायम रखकर काम करें, सदन बहस का स्थान नहीं

Fri, 14 Jul 2023 03:12 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राज्यपाल मिश्र ने कहा कि संविधान में लोकसभा, राज्यसभा, विधानमंडलों के अंतर्गत चुने हुए प्रतिनिधियों को बहुत सारे अधिकार और विशेषाधिकार दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सदस्य प्रयास करें कि सदन निरर्थक बहस और आरोप-प्रत्यारोप लगाने का स्थान नहीं बने। 
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सदन में संबोधित करते हुए राज्यपाल कलराज मिश्र। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को 15वीं राजस्थान विधानसभा के आठवें सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता बहुत प्यार से चुनकर भेजती है, ऐसे में उनका चाल-चलन, व्यवहार, आचार-विचार सब जनता के हित को ध्यान में रखते हुए ही होना चाहिए।  

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राष्ट्रपति मुर्मु के संबोधन से पहले राज्यपाल कलराज मिश्र ने भी संदन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने विधायकों से सदन की मर्यादा को कायम रखते लोकतंत्र के सशक्तिकरण के लिए कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विधायिका यदि प्रभावी रूप में कार्य करती है तो उसका सीधा असर कार्यपालिका पर पड़ता है और कालान्तर में इससे जनता के हित से जुड़े मुद्दों, विकास कार्यों, जन-कल्याण योजनाओं को धरातल पर लाते हुए उनका बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकता है।

राज्यपाल ने कहा कि भारतीय परंपराओं में आरम्भ से ही लोकतांत्रिक मूल्यों में आस्था रही है। संसदीय लोकतंत्र के लंबे अनुभव के आधार पर वह यह कह सकते हैं कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता में ही निहित है जो जनप्रतिनिधियों को चुनकर भेजती है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में बैठे प्रतिनिधियों का यह कर्तव्य है कि वे जन विश्वास पर खरा उतरते हुए उनके सर्वांगीण विकास के लिए काम करें। 
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राज्यपाल मिश्र ने विधायी दायित्वों की चर्चा करते हुए कहा कि संविधान में लोकसभा, राज्यसभा, विधानमंडलों के अंतर्गत चुने हुए प्रतिनिधियों को बहुत सारे अधिकार और विशेषाधिकार दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सदस्य प्रयास करें कि सदन निरर्थक बहस और आरोप-प्रत्यारोप लगाने का स्थान नहीं बने और वे अपने अधिकारों, विशेषाधिकारों का उपयोग करते हुए यहां जन-कल्याण से जुड़े मुद्दों को सार्थक रूप से उठाने का कार्य करें।

उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सदन की बैठकें समय पर आहूत होनी चाहिए। एक ही सत्र को लम्बा नहीं चलाया जाए बल्कि सत्रावसान की कार्यवाही समुचित ढंग से यथासमय होनी चाहिए।

सामाजिक विषमता कम करने की चुनौती को स्वीकार करें- विधानसभा अध्यक्ष
स्वागत उद्बोधन में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने कहा कि यह भारतीय लोकतंत्र की ही विशेषता है कि एक साधारण परिवार से आकर कोई देश के राष्ट्रपति के सर्वोच्च पर पर पहुंचता है। उन्होंने पहली बार विधानसभा में राष्ट्रपति के आगमन को एतिहासिक बताते हुए द्रौपदी मुर्मु का स्वागत किया। उन्होंने आजादी के बाद संसदीय लोकतंत्र के माध्यम से देश और राज्य में हुए विकास की चर्चा करते हुए कहा कि लोकतंत्र जनता को समता और न्याय के लिए कार्य करने को प्रेरित करता है। 

डॉ. जोशी ने कहा कि संविधान में संसदीय लोकतंत्र के माध्यम से केंद्र सरकार और राज्य सरकार को कानून बनाने का अधिकार दिया गया है उनके अनुसार हमें ऐसे कानून बनाने चाहिए जो देश और प्रदेश को आगे बढ़ाने का कार्य करें। इस सदन के सदस्यों ने संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करते हुए राजस्थान के नव निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आजादी के बाद 75 वर्ष में देश में राजनीतिक न्याय तो सुनिश्चित हुआ है, लेकिन आर्थिक और सामाजिक स्तर पर बहुत कुछ किया जाना बाकी है। उन्होंने इन चुनौतियों को स्वीकार करते हुए सामाजिक विषमता कम करने और सौहार्द बढ़ाने के लिए साथ मिलकर कार्य करने पर बल दिया।

शुरुआत में राज्यपाल मिश्र ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को हरियाली और खुशहली के प्रतीक के रूप में पौधा और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने स्मृति चिन्ह भेंट किया। विधानसभा में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में राज्यमंत्रिपरिषद् के सदस्य, विधायक और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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