पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के जन्मदिन में उमड़ी थी हजारों लोगों की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के जन्मदिन ने राज्य की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। जन्मदिन के नजारे को देख दोनों ही पार्टियों के प्रदेश नेतृत्व ने विचार करना शुरू कर दिया है। वसुंधरा के जन्मदिन पर हुए शक्ति प्रदर्शन में पहुंचकर कांग्रेस से निष्कासित और निर्दलीय विधायक सुखबीर सिंह ने मारवाड़ सहित प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। इस शक्ति प्रदर्शन में शामिल होने के लिए भाजपा के 42 विधायक और 11 सांसद ने केशारायपाटन पहुंचे थे। इन सबसे ज्यादा चर्चा सुखबीर सिंह की ही हो रही है।
पाली के कांग्रेसी नेताओं में चचा है कि कांग्रेस से बगावत के बाद निष्कासन, सरकार गिराने के आरोप और फिर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खास होने का दावा करने वाले सुखबीर सिंह वसुंधरा खेमे में क्या कर रहे हैं? बता दें कि पाली की छह विधानसभा सीटों में से एक भी कांग्रेस के पास नहीं है। कांग्रेस से टिकट कटने के बाद सुखबीर सिंह निर्दलीय चुनाव जीते थे। 2020 में अशोक गहलोत सरकार गिराने की साजिश में कई निर्दलीय विधायकों पर केस दर्ज हुए थे। इसके बाद भी सभी गहलोत सरकार की तारीफ करते नजर आए थे।
सुखबीर सिंह पर आरोप लगा था कि उन्होंने गहलोत सरकार गिराने की साजिश रचने में मदद की। हालांकि, इन आरोपों को सुखबीर ने सिरे से नकारा दिया था। इस दौरान वसुंधरा और गहलोत से हुई उनकी मुलाकातों ने राजनीतिक माहौल को बदल दिया था। इधर, बजट सत्र में सुखबीर ने अशोक गहलोत की जमकर तारीफ की थी। उन्होंने सीएम की तुलना मारवाड़ के महान यौद्धा जैता और कूंपा से की थी। इसके बाद भी सुखबीर का पूर्व सीएम वसुंधरा के शक्ति प्रदर्शन में शामिल होने कई सवाल खड़े कर रहा है।
थाम सकते हैं भाजपा का दामन
कांग्रेस के एक बड़े नेता ने नाम नहीं लिखने की शर्त पर कहा कि पार्टी से निष्कासित सुखबीर सिंह आने वाले चुनावों में भाजप का दामन थाम सकते हैं। 2023 में कांग्रेस से उन्हें टिकट मिलने की संभावना कम है। कांग्रेस से एक नए चेहरे पर दावं खेल सकती है। बता दें कि सुखबीर सिंह जोरावर के अलावा गहलोत सरकार को समर्थन देने वाले निर्दलीय विधायक सुरेश टाक और ओम प्रकाश हुड़ला भी शक्ति प्रदर्शन में शामिल हुए थे।