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राजस्थान में AAP की दाल गलना मुश्किल

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राजस्थान में आप पार्टी सभी 25 सीटों पर अपना भाग्य आजमाना चाह रही है, लेकिन यहां दाल गलना मुश्किल लग रहा है। यहां के मतदाताओं को भाजपा व कांग्रेस के अलावा कोई भी तीसरी पार्टी पसंद नहीं है।
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आप राजस्थान के लिए नई पार्टी है, लेकिन अन्य प्रदेशों में अपनी पकड़ बना चुके बसपा, सीपीएम, सीपीआई, एनसीपी सहित किसी भी तीसरी पार्टी का वोट बैंक नाम मात्र का रहा है। जबकि 90 प्रतिशत से अधिक वोट बैंक कांग्रेस व भाजपा के पास ही है।

राजस्थान में पिछले लोकसभा चुनावों को देखते हुए कहा जा सकता है कि तीसरी किसी भी पार्टी की राह आसान नहीं होगी। हालांकि निर्दलीय जरूर कुछ हद तक टक्कर देने में कामयाब रहे हैं। 1999 और 2009 में दो निर्दलीय उम्मीदवार संसद पहुंचे।
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बसपा, सीपीएम, सीपीआई, एनसीपी समेत कई अन्य दल प्रदेश में खाता ही नहीं खोल पाए हैं। पिछले चुनाव में तो बसपा को एक प्रतिशत भी वोट भी नहीं मिला था।

जिसकी सरकार, उसकी अधिक सीटें

राजस्थान में खास बात रही है कि भाजपा या कांग्रेस में से जो पार्टी राज्य में सत्ता हासिल करती है, उसे ही लोकसभा चुनाव में अधिक सीटें मिलती हैं।

वर्ष 1998 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो उसे लोकसभा चुनावों में 25 में से 18 सीटें मिली। 2003 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो यहां से भाजपा के 21 लोकसभा प्रत्याशी जीते। इसी प्रकार 2008 में कांग्रेस की सरकार बनी तो अगले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 20 सीटें मिली।
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पार्टियों के मत प्रतिशत

पार्टी ----- 1999 ----- 2004 ----- 2009
भाजपा ----- 47.23 ----- 49.01 ----- 36.57
कांग्रेस ----- 45.12 ----- 41.42 ----- 47.19
सीपीआई ----- 0.42 ----- 0.37 ----- 3.37
सीपीएम ----- 0.49 ----- 0.51 ----- 0.26
एनसीपी ----- 0.00 ----- 0.21 ----- 1.27
बसपा ----- 2.76 ----- 3.16 ----- 0.00
अन्य ----- 2.63 ----- 2.59 ----- 2.03
निर्दलीय ----- 1.35 ----- 2.73 ----- 9.31
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