दौसा जिले के बांदीकुई को जिला बनाने की मांग विधानसभा में बांदीकुई विधायक भागचंद टांकड़ा ने उठाई। भागचंद ने कहा कि बांदीकुई जिला बनने की सारी प्राथमिकताएं पूरी करता है, इसलिए इसे जिले का दर्जा दिया जाए।
पिछले लंबे समय से बांदीकुई को जिला बनाने के लिए लगातार बांदीकुई से आवाज बुलंद होती रही है। अशोक गहलोत सरकार ने एक दर्जन से ऊपर जिले बना दिए और बांदीकुई को जिला का दर्जा नहीं दिया। लंबे अरसे से यह मांग अधूरी है।
इसी मामले को लेकर आज बांदीकुई विधायक भागचंद टांकडा ने विधानसभा मैं कहा कि मेरे विधानसभा क्षेत्र बांदीकुई को लम्बे समय से जिला बनाए जाने की मांग की जाती रही है, जिला बनाए जाने की समस्त योग्यताओं के बावजूद भी गत सरकार ने बांदीकुई को जिला नहीं बनाया जिससे क्षेत्र की जनता में अत्यन्त निराशा व्याप्त है।
उधर, विधायक भागचंद ने कहा कि बांदीकुई दौसा जिले में दौसा के बाद सबसे अधिक आबादी वाला शहर है। बांदीकुई रेलनगरी के नाम से प्रसिद्ध है जो दौसा जिले के मध्य में स्थित है। सामाजिक, आर्थिक दृष्टिकोण से प्रमुख केंद्र है।
विधायक ने बताया कि बांदीकुई जिला क्यों बने
20 अप्रेल 1874 को आगरा फोर्ट से बांदीकुई के लिए पहली ट्रेन भी चली जो कि आज भी एक विशेष उपलब्धि है। जिले की प्रथम अनाज मंडी माधोगंज मंडी है। राजस्थान की सबसे बड़ी रेलवे कॉलोनी बांदीकुई में है। आरपीएफ ट्रेनिंग सेन्टर भी है। बांदीकुई में यातायात सुविधाओं की पर्याप्तता है। रेल मार्ग, सड़क मार्ग के माध्यम से बांदीकुई दौसा, जयपुर, अलवर, दिल्ली, आगरा से जुड़ा हुआ है। देशभर में प्रमुख आस्था केंद्र मेहन्दीपुर बालाजी के दर्शन हेतु लाखों श्रद्धालु रेलमार्ग से बांदीकुई आते हैं। राणा सांगा की छतरी, चांद बावड़ी, हर्षद माता का मंदिर, झाझीरामपुरा, ब्रिटिशकालीन प्रोटेस्टेट और कैथोलिक चर्च हेतु देश-विदेश से पर्यटक निरंतर आते रहते हैं। विधायक ने कहा कि मैं इस ओर सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहा हूं कि बांदीकुई को आमजन की मांग के मद्देनजर जिले का दर्जा दिलवाया जाए। विधानसभा में विधायक द्वारा बांदीकुई को जिला बनाने की मांग उठने के बाद अब बांदीकुई वासियों में एक बार फिर बांदीकुई को जिला बनने की उम्मीद जगने लगी है।