जवान नरेश जाट ने वीडियाे में अधिकारियों पर भी लगाए आरोप।
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राजस्थान के जोधपुर के ट्रेनिंग कैंप में सोमवार को पत्नी और बेटी को 18 घंटे बंधक बनाकर फायरिंग करने वाले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान ने खुद को गोली मार ली थी। मंगलवार को इस मामले में दो वीडियो सामने आए हैं। इन वीडियो में जवान नरेश जाट ने बताया कि वह ऐसा क्यों कर रहा था? वीडियों में उसने सीआरपीएफ के कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
वीडियो में जवान नरेश कह रहा है कि वह संतरी की पोस्ट पर है, छोटा कर्मचारी होने के कारण उसकी उसकी सुनवाई नहीं हो रही थी। अधिकारी परेशान कर रहे थे। उस पर राइफल कॉक करने का आरोप लगाया गया है, जो गलत है।
पढ़ें वीडियों में नरेश ने क्या कहा...
साहब नमस्कार, 1-9-2019 को आरटीसी जोधपुर के नाम से सूरतगढ में रिपोर्ट किया था। दो महीने बाद वहां से वापस जोधपुर पहुंचा। यहां ड्यूटी कर रहा था, लेकिन छुट्टी नहीं मिली तो मैं साहब के पास पहुंचा था। उन्होंने मुझे 15 दिन का टाइम दे दिया था। उसके बाद कोराना टाइम में आरटीपीसीआर रिपोर्ट लेने गया और मेरा एक्सिडेंट हो गया। इस कारण मुझे छुट्टियां लेनी पड़ी तब डीआईजी भूपेंद्र साहब ने बख्श दिया और ड्यृटी पर लिया। इसके बाद इन्होंने मुझे सूरतगढ भेजा। वहां मेरे गार्ड कमांडर के साथ झगड़ा हुआ। उसने मेरे हाथ पर काटा, इस दौरान बचाव में मेरी कोहनी से उसकी आंख पर लग गई, लेकिन उसने कहा कि मुझे राइफल का बट्ट मारा है।
वीडियो में वह कहता है कि मेरी पोस्ट संतरी ही थी, इसलिए मेरे नाम से राइफल इश्यू है। राइफल कॉक करने की झूठी बात है, मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। हां- आज राइफल कॉक किया है और चार राउंड फायर किए तो सभी को पता चला। उस दिन मैंने ऐसा कुछ नहीं किया था। अब मेरे फायर करने के बाद सिविल पुलिस को बुलाया गया है। सीआरपीएफ कमांडो लाए, उसे क्यों नहीं बुलाया गया। मैं आइ साल सिविल में ब्लैक बेल्ट रह चुका हूं। 2010 में ईओसी क्वालिफाइड हूं। मैंने कभी लोगों को परेशान नहीं किया, अच्छे से अपनी ड्यृटी की है। फैमिली परमिशन होने के बाव भी मुझे सूरतगढ ड्यूटी पर भेजा गया, क्यों भेजा गया, इन्हें नहीं पता था फैमिली के साथ रहता हूं।
पांच दिन से कहीं आने-जाने नहीं दे रहे हैं, मेरी ड्यूटी नहीं लगा रहे हैं और न ही मुझे गेट पास दिया जा रहा है। छोटा कर्मचारी हूं, इसलिए मेरी कोई सुनता नहीं है। हर कोई राइफल कॉक करने की बात बोल रहा है, लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया। छोटे कर्मचारी को फंसाना हो तो बोल दो कि राइफल कॉक किया है। तब नहीं किया था, लेकिन आज कर रहा हूं। यहां डीसी (डिप्टी कमांडेंट) नहीं हैं, एसी (असिस्टेंट कमांडेंट) को डीसी बनाकर बिठाया है। डीसी के नहीं होने के कारण हमारी सुनवाई नहीं होती है।