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आधे राजस्थान से हुआ कांग्रेस का सफाया

Tue, 10 Dec 2013 01:09 AM IST
समीर शर्मा/अमर उजाला, जयपुर
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राजस्थान के इतिहास में सबसे अधिक उठा-पटक वाले यही चुनाव रहे। जीतनेवाली भाजपा ने न तो इतनी बड़ी जीत के बारे में सपने देखे थे और न ही कांग्रेस को ऐसी शर्मनाक हार की उम्मीद थी।
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स्थिति यह है कि राजस्थान के 33 जिलों में से 17 से कांग्रेस गायब है। जयपुर जिले की 19 में से केवल एक सीट कांग्रेस को मिल पाई है, तो जोधपुर से केवल कांग्रेस से दो बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत ही अपनी सीट बचा पाए।

वहीं, कांग्रेस के 22 मंत्रियों और 68 विधायकों को हार का सामना करना पड़ा। वहीं, कांग्रेस की महिला उम्मीदवारों ने भी निराश किया।

राजस्थान विधानसभा चुनावों के परिणामों ने सभी को चौंका कर रख दिया। कांग्रेस को सबसे अधिक 4 में से 3 सीटें करौली जिले से मिल पाई हैं।

इसके अलावा बीकानेर, सीकर व धौलपुर जिलो से दो-दो तथा जयपुर, जोधपुर, झुंझुनूं, अलवर, भरतपुर, बाड़मेर, जालौर, उदयपुर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, बूंदी व चूरू जिलों से एक-एक सीट ही हाथ लग पाई है।
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कांग्रेस के नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल, पर्यटन मंत्री बीना काक, स्वास्थ्य मंत्री ए.ए. खान, शिक्षा मंत्री बृज किशोर शर्मा सहित 22 मंत्री अपनी जीत की उम्मीद लगाए बैठे थे, जिन्हें जनता ने पूरा नहीं होने दिया। वहीं कांग्रेस ने अपने विधायकों पर खासा भरोसा जताया था।

कांग्रेस ने निर्दलीय के रूप में सरकार को समर्थन देनेवाले विधायकों सहित करीब 80 को टिकट दी थीं, जिनमें से 68 को हार का मुंह देखना पड़ा। इधर, भाजपा ने 26 महिलाओं को चुनाव मैदान में उतारा था और कांग्रेस ने 24 महिलाओं को टिकट दी थीं।

कांग्रेस की केवल एक महिला उम्मीदवार उम्मीदों पर खरी उतर सकी, वहीं भाजपा की 19 उम्मीदवारों ने परचम लहराए। हालांकि 199 सीटों पर 2000 से अधिक उम्मीदवारों के बीच कांग्रेस-भाजपा सहित अन्य पार्टियों व निर्दलियों के रूप में 168 महिलाएं चुनाव में भाग्य आजमा रही थीं, लेकिन केवल इनमें से 25 ही जीत सकीं।
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