हाई-वोल्टेड सियासी ड्रामे की शुरुआत किरोड़ीलाल मीणा की प्रेस कॉन्फ्रेंस से हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस होटल में चिंतन शिविर हो रहा है, वह अवैध है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को उस होटल में चिंतन शिविर का आयोजन नहीं करना चाहिए था, जिसकी जमीन को आदिवासियों से हथियाया गया था।
सोनिया गांधी को भी ऐसी जमीन पर बने होटल में चिंतन शिविर में भाग नहीं लेना चाहिए था। मीणा ने दावा किया कि मेरे पास उस होटल को लेकर कुछ अहम सबूत है, जिसकी वजह से मुझे उदयपुर से अनैतिक तरीके से पुलिस ने निकाला है। मैं 16 मई की सभा में भी जाऊंगा, जो आदिवासियों की सभा है। मैं भी एक आदिवासी हूं। इसके बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की।
पुलिस भाजपा सांसद को कहां ले गई इसकी जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है।
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मीणा ने आरोप लगाया कि होटल ताज अरावली को राजीव आनंद ने बनाया है। इसके निर्माण में सरकार ने सभी नियम ताक पर रख दिए। 2012 में अनुमति मिली, लेकिन रास्ता नहीं था तब संभाग आयुक्त ने नदी में से रास्ता दिया। नदी में कचरा डालकर अवरुद्ध किया गया। 50 फीट का रास्ता बनाया गया। उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि नियम यह है कि नदी के लैंड यूज को किसी भी तरह से बदला नहीं जा सकता है। तब होटल को रास्ता कैसे मिला?
बता दें कि सीएम अशोक गहलोत ने किरोड़ी लाल मीणा को धमाल पट्टी करने वाला बताया था, इसके जवाब में उन्होंने कहा था कि अगर सरकार की नाकामी उजागर करना धमालपट्टी है तो मैं आगे भी करूंगा। चिंतन शिविर से पहले उनका यह धमाल शुरू हो गया है।
उदयपुर को निकले तो पुलिस कमिश्नरेट ले गई
डॉ किरोड़ी लाल मीना एक बार फिर उदयपुर के लिए निकले, तब पुलिस उन्हें जयपुर पुलिस कमिश्नरेट ले गई। वहां से उन्होंने ट्वीट किया कि मैं उदयपुर संभाग में आदिवासी सम्मेलन में भाग लेना चाहता हूं। पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि उन पर दबाव है और वे मुझे जयपुर से बाहर नहीं जाने देंगे। न ही किसी तरह का कोई लिखित आदेश देंगे। मेरे राजनीतिक जीवन में इस प्रकार की तानाशाह सरकार मैंने नहीं देखी जो मुझे मेरे आदिवासी भाई-बहनों से मिलने से रोक रही। मुखिया जी, कान खोलकर सुन लो, राजस्थान का यह शोषित दलित पीड़ित और आदिवासी मेरे साथ हो रहे अत्याचार को सहन नहीं करेगा।