प्रदेश सरकार के चिंतन शिविर में सीएम अशोक गहलोत ने बड़ा फैसला लिया है। राजस्थान में अब एसीबी किसी भी अधिकारी-कर्मचारी को भ्रष्टाचार, दुराचार के मामले में पकड़ेगी, तो संबंधित विभाग उनकी अभियोजन स्वीकृति को अटकाकर नहीं रखेंगे।
सीएम ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने के निर्देश दिए हैं, इस कमेटी में डीओपी सेक्रेटरी और होम सेक्रेटरी शामिल होंगे। यह कमेटी उन केसों पर निर्णय लेगी कि वह केस चलने लायक है या नहीं है। ऐसा नहीं होगा कि डिपार्टमेंट अपने स्तर पर यह निर्णय ले कि केस चलने लायक नहीं है।
मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने जयपुर में चिंतन शिविर में मीडिया से रूबरू होकर कहा- मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस फैसले से एसीबी को मजबूत करने का काम किया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी में DOP विभाग सेक्रेट्री (कार्मिक विभाग सचिव) और होम सेक्रेट्री (गृह सचिव) शामिल होंगे। वह कमेटी जब एसीबी में आए केसों के मामलों को लेकर यह फैसला लेगी कि वह केस चलने लायक है या नहीं है, तो हाई लेवल पर फैसला होगा। इससे अभियोजन स्वीकृति के लिए एसीबी को विभागों का मुंह नहीं देखना पड़ेगा। एसीबी को मजबूती मिलेगी।
मंत्री खाचरियावास ने कहा कि कोटा में प्रोफेसर के बच्ची से एक्सटॉर्शन का जो मामला हुआ है, चिंतन शिविर में सीएम ने उस पर लंबी चर्चा की है। मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से लिया है। साथ ही परीक्षाओं के पेपर लीक के मामले पर भी लंबा डिस्कशन हुआ है। एक्सटॉर्शन, पेपर लीक और करप्शन इन तीनों पर सरकार सख्त रुख अपना रही है। इन मामलों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करेंगे। कमेटी भ्रष्टाचार के साथ ही एक्सटॉर्शन और इस तरह के मामलों पर भी एक्शन लेगी।
बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए एक्ट लाएगी सरकार
खाचरियावास ने बताया- प्रदेश में पढ़ने वाले बच्चों का फ्यूचर सिक्योर करने के लिए सरकार एक्ट लाने की तैयारी कर ही है। जिसे आगामी विधानसभा सत्र में लाया जाएगा। एक्ट में कोचिंग इंस्टिट्यूटस, मेडिकल यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी, प्राइवेट कॉलेज में स्टूडेंट का भविष्य सुरक्षित करने के प्रावधान शामिल किए जाएंगे।
इस बजट सत्र में राजस्थान कोचिंग इंस्टीट्यूट नियंत्रण, विनियामक विधेयक आएगा। इसके जरिए निजी कोचिंग संचालकों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा। संबंधित स्टेक होल्डर्स और आमजनता से इस बिल के संबंध में चर्चा के लिए सीएम ने निर्देश दिए हैं।