मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट।
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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे सचिन पायलट के बीच काफी समय से विवाद चल रहा है। अगले साल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कांग्रेस आलाकमान के लिए इस विवाद को सुलझाना बेहद ही महत्वपूर्ण हो गया है। सूत्रों का कहना है कि इसी विवाद को निपटाने को लेकर हाल ही में दोनों नेताओं से सोनिया गांधी ने चर्चा की थी।
पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच विवाद का असर विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिल सकता है। पंजाब चुनाव में इसका असर देखने को भी मिला था। यहां तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच विवाद की चर्चा आम हो गई थी। बाद में अमरिंदर ने कांग्रेस छोड़कर दूसरी पार्टी बना ली। पंजाब में हुए विस चुनाव को में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था।
ऐसा राजस्थान में ना हो इसे लिए सचिन पायलट ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ विचार-विमर्श किया है। इसके बाद से पर्याप्त संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस राज्य में सत्ता बनाए रखने और 30 साल का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए प्रदेश नेतृत्व में बड़ा बदलाव कर सकती है।
जल्द से जल्द हो निर्णय
पार्टी के शीर्ष सूत्रों के अनुसार राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 जीतने के लिए समय पर हस्तक्षेप जरूरी है। अगर, परिवर्तन का कोई निर्णय लिया जाना है तो ऐसा तत्काल होना चाहिए। इससे नेताओं को बेहतर प्रदर्शन करने का समय मिलेगा और अंतिम समय में कोई समस्या भी सामने नहीं आएगी। पांच राज्यों में मिली बड़ी हार के बाद कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने विभिन्न राज्यों में होने वाले चुनावों से कम से कम एक साल पहले संगठन में बदलाव करने का फैसला किया था।
बुधवार को गहलोत, गुरुवार को सोनिया से मिले पायलट
बता दें कि बुधवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। इसके अगले दिन गुरुवार को सचिन पायलट ने करीब एक घंटे तक सोनिया गांधी के साथ बैठक की थी। इससे पहले पायलट ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और पार्टी नेता राहुल गांधी से भी मुलाकात की थी। सूत्रों के अनुसार पायलट लगातार कांग्रेस आलाकमान के संपर्क में हैं। सोनिया गांधी के साथ बैठक करने के बाद पायलट ने कहा था कि कांग्रेस का लक्ष्य राजस्थान में एक बार फिर सरकार बनाना है।