केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के जल जीवन मिशन पर बैठक बुलाने पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हमला बोला है। गहलोत ने कहा कि प्रदेश की जनता ने लोकसभा की सभी सीटों पर दो-दो बार एनडीए के सांसद जिताए, लेकिन सांसद बने केंद्रीय मंत्रियों और अन्य सांसदों ने राज्य के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार पर कभी दबाव नहीं बनाया। यह बड़ा ही दुखद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं आशा करता हूं कि कल शुक्रवार को भाजपा के सांसद केंद्र द्वारा राजस्थान के अटकाए गए प्रोजेक्ट्स का प्रस्ताव पास कर केंद्र सरकार को भेजेंगे। पिछले कार्यकाल में हमारी सरकार ने सरमथुरा से गंगापुर वाया करौली, चौथ का बरवाड़ा से अजमेर वाया टोंक, रतलाम से डूंगरपुर वाया बांसवाड़ा का काम शुरू किया था, जिसे केंद्र की भाजपा सरकार के आने के बाद रोक दिया गया। 2013 में भीलवाड़ा के रूपाहेली में मेमू कोच फैक्ट्री की नींव भी रखी गई थी, जिसका काम भी केंद्र ने बंद कर दिया। प्रदेशवासियों की नजरें सदों की बैठक पर हैं, क्योंकि सब जानना चाहते हैं कि उनके सांसद इन योजनाओं का काम बंद करने पर क्या बोलेंगे?
सीएम ने कहा कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) के 13 जिलों के 10 सांसदों की ओर जनता देख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने का वादा दो-दो बार किया था। इसके बाद भी 13 जिलों की इस जीवनदायिनी परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना नहीं बनाया गया है। अब देखना है कि ये सांसद बैठक में ईआरसीपी के हक की मांग रख भी पाते हैं या नहीं।
राजस्थान जैसे राज्य को मिलना चाहिए हक
सीएम गहलोत ने कहा कि राजस्थान एक रेगिस्तानी राज्य है। यहां एक भी बारहमासी नदी नहीं है। गांव और ढाणी दूर-दूर बसे हुए हैं। जहां पानी उपलब्ध है उसकी गुणवत्ता अच्छी नहीं है। ऐसे में राजस्थान की पानी की परियोजनाओं जैसे जल जीवन मिशन, ईआरसीपी, परवन परियोजना आदि में 90% आर्थिक व्यय केंद्र सरकार को वहन करना चाहिए। जब पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण जल परियोजनाओं में 90% खर्च वहन किया जा सकता है तो राजस्थान जैसे राज्य को तो ये हक मिलना ही चाहिए।