राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया के असम के राज्यपाल बनने के चलते गुलाब चंद कटारिया नेता प्रतिपक्ष के पद पर नहीं रह सकते हैं और सदन भी चालू है, इसलिए भाजपा की तुरंत ही नेता प्रतिपक्ष का चुनाव करना होगा। जिसके चलते आज मंगलवार को विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में विधायक अपना नया नेता चुनेंगे जो विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निभाएगा।
आलाकमान से तय होगा नाम
भाजपा भी एक कैडर बेस पार्टी है, जिसमें आलाकमान की बात को आदेश माना जाता है, इसलिए सूत्रों के अनुसार नेता प्रतिपक्ष का नाम आलाकमान से ही तय होना है और बैठक में उस नाम पर मुहर लगाना बाकी है। नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में राजस्थान भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं में एक आशा जागृत हुई है, जिसके चलते कई नेता अपनी-अपनी लॉबिंग में जुटे हुए हैं।
दौड़ में शामिल कई नेता
राजस्थान विधानसभा नेता प्रतिपक्ष के नाम को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौर, मदन दिलावर, अरुण चतुर्वेदी और सतीश पूनिया भी अपने भाग्य को आजमाने में लगे हैं। जानकारी के अनुसार नाम आलाकमान को तय करना है और नाम तय हो चुका है, जिसकी घोषणा मात्र बची है जो विधायक दल की बैठक में हो सकता है।
नेता प्रतिपक्ष हो सकता है भावी मुख्यमंत्री
नेता प्रतिपक्ष के नाम को भावी मुख्यमंत्री के रूप में भी प्रसारित किया जा रहा है। भाजपा राजस्थान प्रदेश इकाई में लगभग एक दर्जन से ज्यादा मुख्यमंत्री के दावेदार हैं, इसलिए कयास लगाए जा रहे हैं कि जो भी नेता प्रतिपक्ष बनाया जाएगा वो 2023 के चुनाव में भाजपा का मुख्यमंत्री का चेहरा हो सकता है। राजस्थान की राजनीति में भाजपा में चल रही अंदरूनी कलह विधायक दल की बैठक में खुल कर सामने आ सकती है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा के प्रदेश इकाई के कई नेता दिल्ली में अपने संपर्क के माध्यम से अपने नाम को चलाने में लगे हुए हैं।
संघ की भूमिका अहम होगी
राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष के नाम पर मुहर लगने से पहले संघ की भूमिका भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि छह महीने में विधानसभा के चुनाव होने हैं इस परिस्थिति में भाजपा का आलाकमान संघ की राय को नजरअंदाज नहीं कर सकता है। संगठन मंत्री चन्द्रशेखर की राय अहम मानी जा रही है।