लोकतंत्र की रोचक तस्वीर चुनाव में देखने को मिलती है। आजादी से पहले जिनके सामने जनता हाथ जोड़ती थी और उम्मीद के साथ कुछ मांगने के लिए हाथ फैलाती थी, अब वे आम जनता के सामने हाथ जोड़ेंगे और विनम्र होकर वोट मांगेंगे।
राजवाड़ों के लिए मशहूर राजस्थान में आधा दर्जन राजघराने राजस्थान विधानसभा चुनाव में अपना भाग्य आजमा रहे हैं।
इनमें भाजपा से मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार वसुंधरा राजे भी शामिल हैं। लंबे अरसे बाद जयपुर राजघराना भी चुनाव मैदान में है।
वसुंधरा राज
प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया धौलपुर राजघराने की पूर्व महारानी हैं और पांच बार सांसद रह चुकीं हैं।
वर्ष 2003 से 2008 तक वे राजस्थान की मुख्यमंत्री रहीं और वे इस बार भी झालरापाटन से चुनाव लड़ रही हैं।
दीया कुमारी
कुछ महीने पहले भाजपा में शामिल हुईं जयपुर राजघराने की पूर्व राजकुमारी दीया कुमारी पहली बार चुनाव मैदान में उतर रही हैं।
उनके पिता भवानी सिंह कांग्रेस की टिकट से संसद का चुनाव लड़े थे। दीया भाजपा की टिकट पर सवाई माधोपुर से चुनाव लड़ेंगी।
सिद्धी कुमारी
बीकानेर की पूर्व राजकुमारी सिद्धी कुमारी को भाजपा ने पहली बार 2008 में टिकट दिया था और वे विधानसभा पहुंची। इस बार भी भाजपा ने फिर से उन पर दांव लगाते हुए बीकानेर पूर्व से मैदान में उतारा है।
सिद्धी के दादा करणी सिंह ने बीकानेर से पांच बार निर्दलीय सांसद के तौर पर लोकसभा पहुंचे थे।
डीग राजघराने की पूर्व राजकुमारी किशनेंद्र कौर दीपा को भी भाजपा ने फिर से मैदान में उतारा है। दीपा वर्तमान में डीग सीट से विधायक हैं।
वहीं, करौली की पूर्व महारानी रोहणी कुमारी भी भाजपा की ओर से चुनाव मैदान में हाजिर हैं।
इधर, कांग्रेस की ओर से राजघराने के नाम पर मात्र एक टिकट भरतपुर राजघराने के विश्वेन्द्र सिंह हैं, वे पिछली बार भी डीग-कुम्हेर सीट से चुनाव लड़े थे, लेकिन हार हाथ लगी थी।
इस बार भी वे इसी सीट से कांग्रेस की टिकट पर मैदान में है और उनके सामने भाजपा से पिछली बार जीत दर्ज करनेवाले पूर्व चिकित्सा मंत्री डॉ. दिगम्बर सिंह हैं।