राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने पाली जिले की छह में से पांच विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। जबकि कांग्रेस छह में से दो विधानसभा से ही अपने प्रत्याशी घोषित कर पाई है।
वर्तमान में भाजपा ने पाली से वर्तमान विधायक ज्ञानचंद पारख, सुमेरपुर से विधायक जोराराम कुमावत, जैतारण से विधायक अविनाश गहलोत, बाली से विधायक पुष्पेन्द्र सिंह एवं सोजत से विधायक शोभा चौहान पर फिर से भरोसा जताया है। जबकि मारवाड़ जंक्शन से अभी प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने मारवाड़ जंक्शन से निर्दलीय विधायक खुशवीर सिंह को एवं सोजत से राजस्थान के पूर्व मुख्य सचिव निरंजन आर्य को अपना प्रत्याशी घोषित किया है।
सिर्फ एक सीट पर हुई दोनों दलों के प्रत्याशियों की घोषणा
इन स्थितियों में पाली जिले की छह विधानसभा सीटों में से सोजत विधानसभा सीट ही एकमात्र सीट है, जहां पर भाजपा एवं कांग्रेस के प्रत्याशी घोषित होने से अब स्थितियां साफ हो गई हैं कि यहां पर दोनों ही पाटियों से कौन-कौन आमने-सामने होगा। जबकि पांच सीटों पर स्थितियां अभी साफ होना शेष हैं। क्योंकि जिले की एक सीट पर भाजपा एवं चार सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों की घोषणा का सभी को इंतजार है। मारवाड़ जंक्शन विधानसभा सीट ही एकमात्र सीट है, जहां से कांग्रेस ने पहले प्रत्याशी की घोषणा की है, जबकि भाजपा अभी तक यहां से प्रत्याशी घोषित नहीं कर पाई है। अब पाली जिले की चार विधानसभा सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों एवं एक विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी की घोषणा का सभी को बेसब्री से इंतजार है।
वर्तमान विधायकों पर जताया गया भरोसा
हालांकि जिन सीटों पर भाजपा ने प्रत्याशियों की घोषणा की है, उनमें से कुछ पर वर्तमान विधायकों के टिकट काटकर नए प्रत्याशियों को टिकट मिलने की चर्चा जोरों पर थी और यहां पर भाजपा की ओर से पहली बार बड़ी तादात में नेताओं ने दावेदारी भी जताई थी। जिसमें पूर्व सांसद तक शामिल थे, लेकिन भाजपा ने वर्तमान विधायकों में ही विश्वास जताते हुए सभी को पुनः मैदान में उतारा है। जबकि कांग्रेस ने मारवाड़ जंक्शन से निर्दलीय विधायक खुशवीर सिंह पर भरोसा जताया है एवं सोजत विधानसभा सीट से पूर्व आईएएस निरंजन आर्य को प्रत्याशी बनाया है।
सोजत में 8 बार कांग्रेस एवं 5 बार रहा है भाजपा का कब्जा
यहां आजादी के पश्चात अब तक 15 विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें एक बार निर्दलीय, एक बार स्वतंत्र पार्टी, 5 बार भाजपा जबकि 8 बार कांग्रेस ने जीत हासिल की है। 1957 एवं 1962 में यहां कांग्रेस के तेजाराम ने लगातार दो बार कब्जा किया, जिसे 1967 में स्वतंत्र पार्टी के पुखराज ने छीन लिया। फिर पुनः 1972 में पुखराज ने ही कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर यहां पर जीत हासिल की।