केंद्र में आरक्षण की मांग को लेकर जाट समाज का दूसरे दिन यानी गुरुवार को भी भरतपुर जिले में उच्चैन के जयचौली गांव में महापड़ाव जारी है। प्रशासन ने गांव को छावनी में तब्दील कर दिया है। जयचौली के रेलवे स्टेशन जीआरपी और आरपीएफ के अधिकारी और सुरक्षाकर्मी तैनात किए हुए हैं। रेलवे स्टेशन की तरफ जाने वाले लोगों पर निगरानी रखी जा रही है।
आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक नेम सिंह फौजदार ने बताया कि जाट समाज के लिए केंद्र आरक्षण की मांग को लेकर जाट समाज ने 17 जनवरी से गांधीवादी तरीके से आंदोलन की शुरुआत की है। 22 जनवरी को भगवान श्रीराम के उद्घाटन का कार्यक्रम है। जाट समाज हमेशा अनुशासित रहा है। जाट समाज ने सोच समझ कर यह निर्णय लिया है कि 22 जनवरी तक हम किसी तरह का रोड जाम और रेल की पटरी जाम नहीं करेंगे। भगवान श्रीराम के उद्धघाटन के कार्यक्रम में जाट समाज नासूर बनना नहीं चाहता। हम गांधीवादी तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचा रहे हैं।
सरकार जाट समाज की समझदारी को समझ रही कमजोर
सरकार की एक मंशा और मानसिकता रहती है। गांधीवादी विचारधारा से आंदोलन को कभी सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया। यहां पर शांति प्रिय महापड़ाव चल रहा है, लेकिन अंदरखाने हमारी रणनीति है। 22 जनवरी तक आंदोलन गांधीवादी रहेगा। 22 जनवरी तक सरकार ने जाट समाज की समझदारी को कमजोर समझा तो, यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा। 2017 में सरकार जाट समाज का आंदोलन देख चुकी है। उसकी पुनरावृत्ति जाट समाज करना नहीं चाहता। अगर सरकार जानबूझकर यही करवाने के राजी हैं तो, निश्चित तौर पर इस बार जाट समाज ने आर-पार की लड़ाई के मूढ़ में यह आंदोलन शुरू किया है। इस आंदोलन का निर्णय अब नहीं तो कभी नहीं का नारा देकर शुरू किया है।
22 जनवरी के बाद आंदोलन उग्र होगा
जो भी जाट समाज को कदम उठाना पड़े, जैसे पटरी पर जाना है, सडकों पर जाना है, जो भी रास्ते जाट समाज को अपनाने पड़े, वह जाट समाज अपनाएगा, जिसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी। बार-बार सरकार को मौका दिया जा रहा है। 25 दिसंबर से जाट समाज ने आंदोलन की शुरुआत की, सात जनवरी को हुंकार सभा हुई, जिसमें आरक्षण संघर्ष समिति के संरक्षण विश्वेंद्र सिंह भी पहुंचे। सरकार को 10 दिन का समय दिया।
श्रीराम भगवान के मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के कारण हम लोग जयचौली में महापड़ाव डाले हुए हैं। सरकार की तरफ से अभी तक कोई भी सकारात्मक रवैया नहीं अपनाया गया है। सरकार जाट समाज के धैर्य की परीक्षा ले रही है, लेकिन जाट समाज का धैर्य 22 जनवरी तक ही रहेगा। 22 के बाद आंदोलन बड़ा होगा-उग्र होगा, जिसकी जिम्मेदार सरकार होगी।